Bihar Politics: अधिकारियों अब नहीं दे सकेंगे प्रतियोगी परीक्षा! विजय सिन्हा के एक आदेश से मच गया बवाल, कांग्रेस नेता का जबरदस्त हमला

Bihar Politics: पटना में नगर विकास एवं आवास विभाग के एनओसी निर्देश को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस प्रवक्ता डॉ स्नेहाशीष वर्धन ने इसे कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों पर हमला बताया है और भाजपा सरकार पर निशाना साधा है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हा के आदेश से बवाल! - फोटो : social media

Bihar Politics: बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कर्मचारियों के प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने को लेकर नया आदेश जारी की है। जिससे विभाग में हड़कप मच गया है। आदेश का बड़े स्तर पर विरोध किया जा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस ने भी नीतीश सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है। दरअसल, नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी पत्र में कर्मचारियों को प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने को लेकर यह निर्देश जारी किया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस ने राज्य सरकार और भाजपा पर निशाना साधा है।

अधिकारियों को प्रताड़ित कर रही सरकार 

कांग्रेस प्रवक्ता डॉ स्नेहाशीष वर्धन ने बयान जारी कर कहा कि भारतीय जनता पार्टी जब भी सत्ता में आती है, लोगों को चैन से नहीं रहने देती। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारियों को प्रताड़ित करने के लिए इस तरह के आदेश लाए जा रहे हैं, जिसमें उन्हें एनओसी नहीं देने जैसी बातें शामिल हैं।

अधिकारियों को करियर बनाने का अधिकारी नहीं?

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या कोई दरोगा आगे बढ़कर आईपीएस नहीं बन सकता? क्या अधिकारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का अधिकार नहीं है? उन्होंने उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के विभाग पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि इस तरह के आदेशों पर उन्हें स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह फैसला प्रशासनिक अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का हनन है और भाजपा सरकार इस तरह के फैसलों के जरिए उनकी स्वतंत्रता को सीमित करना चाहती है। इस बयान के बाद राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

अधिकारियों के लिए सख्त आदेश 

दरअसल, बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक बेहद सख्त आदेश जारी किया है। विभाग ने कार्यक्षमता बनाए रखने और समय की बर्बादी को रोकने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। विभागीय पत्र के अनुसार, अब नगर विकास विभाग के अधीन कार्यरत कोई भी पदाधिकारी या कर्मी अपने पूरे सेवा काल (Service Period) में सिर्फ एक बार ही किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा में भाग लेने की अनुमति पा सकेगा। यह अनुमति भी केवल तब दी जाएगी जब वह कर्मी अपने वर्तमान पद के वेतन स्तर (Pay Level) से उच्चतर वेतन स्तर वाले पद के लिए परीक्षा देना चाहता हो।

क्यों लिया गया यह फैसला?

विभाग ने इस कड़े फैसले के पीछे कई तर्क दिए हैं। विभाग का कहना है कि बार-बार परीक्षा की तैयारी और उसमें शामिल होने से विभाग का महत्वपूर्ण समय नष्ट होता है। सरकारी वेतन और सुविधाओं का लाभ लेते हुए बार-बार परीक्षा की अनुमति मांगना लोकहित के खिलाफ माना गया है। लगातार परीक्षाओं में भाग लेने से विभागीय कार्यों के निष्पादन में गंभीर अवरोध उत्पन्न होता है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि कोई पदाधिकारी या कर्मी एक से अधिक बार परीक्षा में शामिल होना चाहता है, तो वह सरकारी सेवा से त्याग-पत्र (इस्तीफा) देने के लिए स्वतंत्र है। यानी, अब नौकरी में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। इसको लेकर विरोध जारी है। 

पटना से नरोत्तम की रिपोर्ट