कर्नाटक में बोले वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी : मुख्यमंत्री बनना लक्ष्य नहीं, समाज में बदलाव लाना मेरा सपना

विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने कर्नाटक में अपने सांगठनिक विस्तार की औपचारिक शुरुआत करते हुए सामाजिक न्याय के आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। बेंगलुरु पहुंचे मुकेश सहनी ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना या सत्ता हासिल करना नहीं है....

कर्नाटक में बोले वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी : मुख्यमंत्री बन
कर्नाटक में वीआईपी का सांगठनिक विस्तार - फोटो : देवांशु प्रभात

Patna/Bengluru : विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने कर्नाटक में अपने राजनीतिक विस्तार की औपचारिक शुरुआत कर दी है। बेंगलुरु में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान पार्टी ने राज्य में संगठन निर्माण और सामाजिक न्याय के आंदोलन का बिगुल फूंका। इस अवसर पर वीआईपी के संस्थापक और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी का भव्य स्वागत किया गया। जनसभा को संबोधित करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना या सत्ता हासिल करना नहीं है, बल्कि देश के वंचित, पिछड़े, निषाद, कोली और मेहनतकश समाज को उनका सम्मान और वाजिब अधिकार दिलाना है।


झोपड़ी में रहकर बादशाह बनना बेहतर, किसी के महल में गुलामी करने से : मुकेश सहनी

अपने जीवन के संघर्षों को साझा करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि वह एक अत्यंत साधारण मछुआरा परिवार से आते हैं। उन्होंने गरीबी और मुफलिसी को बेहद करीब से देखा है। मुंबई में मजदूरी से लेकर एक सफल उद्यमी बनने तक का सफर उन्होंने तय किया, लेकिन जब अपने समाज की बदहाली देखी, तो आरामदायक जीवन छोड़कर संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा, "अगर मैं समझौता कर लेता तो आज बिहार का मुख्यमंत्री बन सकता था, लेकिन मैंने समाज के हितों को अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से ऊपर रखा। झोपड़ी में रहकर बादशाह बनना बेहतर है, किसी के महल में गुलामी करने से।"


निषाद और कोली समाज के वर्गीकरण की विसंगति पर उठाए सवाल

मुकेश सहनी ने देश के अलग-अलग राज्यों में निषाद और कोली समाज की संवैधानिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह समाज देशभर में कई नामों से जाना जाता है, लेकिन विभिन्न राज्यों में इनका वर्गीकरण अलग-अलग है। कहीं इन्हें अनुसूचित जाति (SC), कहीं अनुसूचित जनजाति (ST) तो कहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की श्रेणी में रखा गया है। यह व्यवस्था सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के पूरी तरह विपरीत है। वीआईपी पूरे देश में इसी विसंगति को दूर करने और "जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी" के सिद्धांत को लागू कराने के लिए संघर्ष कर रही है।


बी.के. मोहन कुमार के नेतृत्व में कर्नाटक में मजबूत विकल्प बनेगी वीआईपी

मुकेश सहनी ने कर्नाटक वीआईपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष बी.के. मोहन कुमार को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आने वाले समय में उन्हें कई राजनीतिक प्रलोभन मिलेंगे, लेकिन यदि वे समाज के हितों के प्रति अडिग रहे, तो जनता उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि मोहन कुमार के नेतृत्व में पार्टी कर्नाटक में एक मजबूत और ईमानदार राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरेगी। सहनी ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए मतदान के अधिकार ने गरीब और अमीर को समान ताकत दी है और इसी लोकतांत्रिक शक्ति के बल पर यह लड़ाई आगे बढ़ेगी।


यूपी चुनाव के बाद कर्नाटक में निकलेगी 'संकल्प यात्रा', संतों का मिला आशीर्वाद

वीआईपी प्रमुख ने घोषणा की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद वह कर्नाटक का व्यापक दौरा करेंगे और यहां 'संकल्प यात्रा' निकालकर समाज के हर वर्ग के बीच संवाद स्थापित करेंगे। समारोह के अंत में उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे संत समाज के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में पहली बार इतने बड़े स्तर पर संतों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है, जो राज्य में नई राजनीतिक चेतना का निर्माण करेगा।

इस ऐतिहासिक मौके पर कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष बी.के. मोहन कुमार, पद्म श्री मधमा, सुधा श्री सहित कई पूज्य स्वामी और संत गण उपस्थित रहे। इसके अलावा बिहार और दिल्ली से आए पार्टी के वरिष्ठ नेता, जिनमें दिल्ली के रिटायर्ड कमिश्नर बी.के. सिंह, वीआईपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सहनी, मनीष आनंद, बैजनाथ सहनी, परमदेव चौधरी, देव ज्योति, बिहार प्रदेश अध्यक्ष बालगोविंद बिंद, नीलाभ कुमार, कुणाल कुमार और लालबाबू सहनी सहित दर्जनों पदाधिकारी शामिल थे।


देवांशु प्रभात की रिपोर्ट