बिहार राज्यसभा चुनाव में नहीं चलेगा व्हिप, विधायकों की एक गलती से वोट हो सकता है अमान्य

चुनाव से जुड़े नियम Representation of the People Act, 1951 में निर्धारित किए गए हैं। चूंकि राज्यसभा चुनाव को सदन के अंदर होने वाले मतदान की तरह नहीं माना जाता, इसलिए इसमें व्हिप लागू नहीं होता।

 Bihar Rajya Sabha elections
Bihar Rajya Sabha elections- फोटो : news4nation

  Bihar Rajya Sabha elections : बिहार में 5 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव की वोटिंग 16 मार्च को होनी है। एनडीए के 5 और राजद के 1 उम्मीदवार होने के कारण मुकाबला रोचक हो गया है। ऐसे में दोनों ओर से अपने समर्थित विधायकों को एकजुट रखने के लिए सख्त पहरेदारी भी शुरू हो गई है। वहीं राज्यसभा चुनाव को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या इस चुनाव में राजनीतिक दल अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी करते हैं। 


क्या राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू होता है?

राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक दल व्हिप जारी कर सकते हैं, लेकिन यह सामान्य विधायी वोटिंग जितना बाध्यकारी नहीं माना जाता। कारण यह है कि राज्यसभा चुनाव गुप्त मतदान (secret ballot) से नहीं बल्कि ओपन बैलेट से होता है। विधायक अपने मतपत्र को अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखा सकते हैं। अगर विधायक अपना वोट पार्टी एजेंट को दिखाए बिना डालता है, तो उसका वोट अमान्य हो सकता है।


ऐसे में नियमों के अनुसार राज्यसभा चुनाव में व्हिप लागू नहीं होता है। दरअसल, चुनाव से जुड़े नियम Representation of the People Act, 1951 में निर्धारित किए गए हैं। चूंकि राज्यसभा चुनाव को सदन के अंदर होने वाले मतदान की तरह नहीं माना जाता, इसलिए इसमें व्हिप लागू नहीं होता।


राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली यानी सिंगल ट्रांसफरेबल वोट (STV) के आधार पर कराया जाता है। चुनाव की प्रक्रिया Election Commission of India की निगरानी में होती है। 


एजेंट को दिखा सकते हैं वोट 

राज्यसभा चुनाव की खास बात यह है कि इसमें गुप्त मतदान की जगह ओपन बैलेट सिस्टम लागू होता है। इस व्यवस्था के तहत विधायक अपने वोट को अपनी पार्टी के अधिकृत एजेंट को दिखा सकते हैं। यदि कोई विधायक अपने वोट को पार्टी के अधिकृत प्रतिनिधि को नहीं दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य घोषित किया जा सकता है।

क्रॉस वोटिंग से चुनाव प्रभावित 

हालांकि व्यवहारिक रूप से राजनीतिक दल अपने विधायकों को पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करने के लिए निर्देश देते हैं। कई बार इसी कारण राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग की घटनाएं भी सामने आती हैं, जो चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं।



क्रॉस-वोटिंग करने पर सदस्यता जाती है या नहीं?

आम तौर पर सिर्फ क्रॉस-वोटिंग करने से विधायक की सदस्यता नहीं जाती। भारत में दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) मुख्य रूप से सदन के अंदर विश्वास प्रस्ताव, अविश्वास प्रस्ताव या विधेयकों पर वोटिंग पर लागू होता है। राज्यसभा चुनाव के मामले में क्रॉस-वोटिंग करने पर तुरंत सदस्यता खत्म नहीं होती। लेकिन पार्टी अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है, जैसे निलंबन या निष्कासन हो सकता है लेकिन वह आगे की प्रक्रिया होती है ।