NEET Student Rape Death: तेजस्वी का नवरुणा कनेक्शन, नीट छात्रा हत्याकांड में आखिर तेजस्वी ने क्यों कराई नवरुणा की एंट्री, जानिए वजह...

NEET Student Rape Death: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीट छात्रा हत्याकांड मामले की जांच सीबीआई को सौंपने को लेकर नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला है। साथ ही तेजस्वी ने नवरुणा हत्याकांड का भी जिक्र किया है आइए जानते हैं पूरा मामला

तेजस्वी यादव
क्या था नवरुणा हत्याकांड- फोटो : social media

NEET Student Rape Death: पटना नीट छात्रा हत्याकांड मामला तूल पकड़े हुए है। शनिवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्र सरकार से मांग की कि इस मामले को सीबीआई को सौंपी जाए। जिसके बाद इस मामले में विवाद बढ़ गया। विपक्ष का आरोप है कि केस को सीबीआई को सौंप कर उसे ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है। सीबीआई को सौंपे जाने को लेकर सियासत तेज है। विपक्षी नेता उन सभी केसों का हवाला दे रहे हैं जो अब तक सीबीआई सुलझा नहीं पाई है और कई केस तो ऐसे हैं जिन्हें सीबीआई ने बंद भी कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में भी अब न्याय की उम्मीद बाकी नहीं रह गई है। 

तेजस्वी ने क्यों किया नवरुणा का जिक्र 

दरअसल, शनिवार को डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम इस बात की जानकारी दी कि सीएम नीतीश ने सीबीआई को जांच सौंपने की अपील की है। जिसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने ट्विट के माध्यम से नीतीश सरकार पर बड़ा हमला बोला। साथ ही तेजस्वी ने एक हत्याकांड ता भी जिक्र किया जो सीएम नीतीश के सुशासन काल पर किसी काले धबे की तरह है। तेजस्वी ने अपने ट्विट में नवरुणा कांड का जिक्र किया। इस कांड के 12 साल होने के बाद भी सीबीआई एक भी आरोपी को नहीं पकड़ पाई और जांच भी बंद कर दी। 

खड़े हो रहे कई सवाल 

ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि,आख़िर तेजस्वी यादव ने नीट छात्रा कांड के मामले को नवरुणा कांड से तुलना क्यों की ? इसके पीछे मकसद क्या है ? अब आइए जानते हैं कौन थी नवरुणा जिसकी चर्चा तेजस्वी कर रहे हैं....नवरुणा कांड 17-18 सितंबर 2012 की रात...नवरुणा अपने कमरे में सो रही थी। इसी दौरान अज्ञात अपराधियों ने खिड़की की जाली तोड़कर घर में प्रवेश किया और सोती हुई बच्ची का अपहरण कर लिया। सुबह जब परिवार जागा तो नवरुणा गायब थी और कमरा अस्त-व्यस्त मिला। 

कौन थी नवरुणा 

नवरुणा चक्रवर्ती महज 12 वर्ष की थी और मुजफ्फरपुर के एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार से ताल्लुक रखती थी। वह सेंट जेवियर्स स्कूल में सातवीं कक्षा की छात्रा थी, पढ़ाई में मेधावी और खेलकूद में सक्रिय। उसके पिता अतुल्य चक्रवर्ती फार्मास्यूटिकल व्यवसायी थे, जबकि मां मैत्री गृहिणी थीं। परिवार का पैतृक दो मंजिला मकान वर्ष 1876 में बना था जो शहर के पुराने इलाके जॉन्फर लाल रोड स्थित चक्रवर्ती लेन में था। नवरुणा चक्रवर्ती अपहरण कांड ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया और ‘सुशासन’ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

जांच की रफ्तार देख हताश हुए परिवार 

घटना के बाद नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने तुरंत मुजफ्फरपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई और लैंड माफिया पर शक जताया। अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की कोई मांग नहीं की, जिससे मामला और भी रहस्यमय हो गया। पूरे शहर में सनसनी फैल गई। पुलिस ने छापेमारी शुरू की, कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। परिवार ने सोशल मीडिया पर ‘सेव नवरुणा’ अभियान चलाया। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखे गए। एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हुई, लेकिन सबूतों के अभाव में सभी रिहा हो गए। जांच की धीमी रफ्तार से परिवार हताश होता गया।

26 नवंबर 2012 ‘स्केलेटन ड्रामा’

घटना के दो महीने के बाद नवरुणा के घर के पास एक नाली से एक कंकाल बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने नवरुणा का बताया। कपड़े और अंडरगारमेंट्स भी मिले, लेकिन परिवार ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अतुल्य चक्रवर्ती ने पुलिस पर सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया और डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल देने से मना कर दिया। इससे जांच और उलझ गई।

जमीन विवाद बना मुख्य कड़ी

जांच में सामने आया कि परिवार की छह कठा जमीन, जिसकी कीमत करीब चार करोड़ रुपये बताई गई, इस कांड की मुख्य वजह हो सकती है। जमीन की रजिस्ट्री 10 दिसंबर 2012 को होनी थी। आरोप है कि स्थानीय लैंड माफिया और कुछ राजनेताओं ने जमीन हड़पने की कोशिश की और इनकार पर अपहरण व हत्या की साजिश रची गई। वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा उर्फ पप्पू का नाम प्रमुख रूप से सामने आया।

पीएमओ और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

परिवार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को कई पत्र लिखे। इसके बाद बिहार सरकार से रिपोर्ट तलब की गई। सितंबर 2013 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की, लेकिन एजेंसी ने पहले इनकार कर दिया। आखिरकार 25 नवंबर 2013 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच शुरू हुई। सीबीआई ने फरवरी 2014 में जांच शुरू की। 5 सितंबर 2017 को पहली बड़ी गिरफ्तारी हुई और पार्षद राकेश कुमार सिन्हा पप्पू को जेल भेजा गया। इसके बाद होटल मालिक और प्रॉपर्टी डीलर समेत कई गिरफ्तारियां हुईं। सीबीआई ने दावा किया कि हत्या जमीन विवाद के कारण हुई, लेकिन ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी।

क्लोजर रिपोर्ट और अधूरा इंसाफ

लगभग छह साल की जांच के बाद 24 नवंबर 2020 को सीबीआई ने मुजफ्फरपुर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। रिपोर्ट में अपराध साबित न होने की बात कही गई। आरोपी बरी हो गए। परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन आज तक न्याय नहीं मिल सका। आज वर्ष 2026 में भी नवरुणा चक्रवर्ती कांड अनसुलझा है। यह मामला बिहार के अपहरण उद्योग, पुलिस की कार्यशैली और न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा है।