बिहार में भ्रष्टाचार पर प्रहार: BDO राजकुमार चौधरी को 46 हजार रुपये घूस लेते SVU ने रंगे हाथ दबोचा

बिहार के पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड के बीडीओ (BDO) राजकुमार चौधरी को ₹46,000 की रिश्वत लेते हुए विशेष निगरानी इकाई, पटना ने रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। वेंडर के 16 लाख रुपये के सरकारी भुगतान को रिलीज करने के बदले साहब कमीशन मांग रहे थे।

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BDO राजकुमार चौधरी को 46 हजार रुपये घूस लेते SVU ने रंगे हाथ दबोचा- फोटो : Reporter

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU), पटना ने एक बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने पूर्णिया जिले के बैसा प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) राजकुमार चौधरी को 46,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से जिले के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।


16 लाख के भुगतान के बदले मांगी थी 46 हजार की रिश्वत

यह पूरी कार्रवाई पूर्णिया के ही अनगढ़ थाना क्षेत्र के कँजिया गांव निवासी राज किरण (पिता- स्व. सरोज कुमार) की लिखित शिकायत पर की गई है। शिकायतकर्ता राज किरण सरकारी योजनाओं में सामग्री आपूर्ति करने वाले एक वेंडर (आपूर्तिकर्ता) हैं। उन्होंने बैसा प्रखंड में 16 लाख रुपये की लागत से सरकारी योजनाओं के लिए सामग्री उपलब्ध कराई थी। इसी 16 लाख रुपये के बिल भुगतान को हरी झंडी देने के एवज में बीडीओ राजकुमार चौधरी द्वारा 46,000 रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी।


विशेष निगरानी इकाई ने बिछाया जाल, रंगे हाथ दबोचे गए साहब

वेंडर राज किरण घूस नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित विशेष निगरानी इकाई से की। शिकायत का सत्यापन करने के बाद निगरानी विभाग की टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही गुरुवार (16 जुलाई 2026) को बीडीओ राजकुमार चौधरी ने रिश्वत की राशि 46,000 रुपये स्वीकार की, वैसे ही पहले से घात लगाए बैठी निगरानी की टीम ने उन्हें रंगे हाथ दबोच लिया। आरोपी बीडीओ के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून 1988 की धारा 7 के तहत कांड संख्या- 21/2026 दर्ज किया गया है।


विशेष न्यायालय में होगी पेशी, भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार

निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, बीडीओ राजकुमार चौधरी की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और पूछताछ जारी है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद आरोपी अधिकारी को कल यानी शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय में पेश किया जाएगा। इस सफल छापेमारी को बिहार में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के खिलाफ एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

रिपोर्ट - रंजीत कुमार