Bihar News : पूर्णिया में प्रतिबंधित 'थाई मांगुर' मछली से लदे दो ट्रक पुलिस ने किया जब्त, जेसीबी से गड्ढा खोदकर दी 'जल समाधि'

Bihar News : पूर्णिया के बायसी थाना के डंगराहा चेक पोस्ट के पास पुलिस ने दो ट्रक प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पकड़ा। जिसको नदी के किनारे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफना दिया गया......पढ़िए आगे

Bihar News : पूर्णिया में प्रतिबंधित 'थाई मांगुर' मछली से लद
थाई मांगुर को जलसमाधि - फोटो : ANKIT

PURNEA : बिहार के पूर्णिया जिले से एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहाँ बायसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत डंगराहा चेक पोस्ट के पास पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली से लदे दो विशाल ट्रकों को जब्त किया है। बताया जा रहा है कि यह प्रतिबंधित खेप पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से बिहार के बाजारों में खपाने के लिए लाई जा रही थी। पुलिस को इस बात की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके आधार पर चेक पोस्ट पर घेराबंदी कर दोनों ट्रकों को रोका गया और सघन तलाशी के बाद भारी मात्रा में मौजूद थाई मांगुर को अपने कब्जे में ले लिया गया।

जेसीबी से गड्ढा खोदकर किया गया नष्ट

जब्त की गई प्रतिबंधित मछली को पूरी तरह से नष्ट करने के लिए प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाए गए। डंगराहा नदी के किनारे आनन-फानन में जेसीबी मशीन मंगवाकर एक गहरा गड्ढा खोदा गया। वायरल वीडियो और विजुअल्स में साफ देखा जा सकता है कि ट्रक से थाई मांगुर की बोरियों को उतारकर मजदूर बड़ी संख्या में जिंदा मछलियों को उस गहरे गड्ढे में डाल रहे हैं। स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, पूरी खेप को मिट्टी के नीचे दफनाकर नष्ट कर दिया गया ताकि यह किसी भी हाल में बाजार या आम लोगों तक न पहुंच सके।

मानव शरीर के लिए जानलेवा है यह मछली

इस कार्रवाई पर विस्तृत जानकारी देते हुए पूर्णिया के जिला मत्स्य पदाधिकारी विकास कुमार सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा थाई मांगुर पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है क्योंकि यह मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस मछली के लगातार सेवन से लीवर और किडनी फेल होने के साथ-साथ 'कैंसर' जैसी जानलेवा बीमारियां होती हैं। यह मछली इंसानी शरीर के अंदरूनी अंगों को धीरे-धीरे खोखला और बेहद कमजोर कर देती है, जिसके कारण यह सीधे तौर पर इंसानी जीवन के लिए एक धीमा जहर है।

जलीय पर्यावरण के लिए भी है बड़ा खतरा

मत्स्य पदाधिकारी ने इसके पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) नुकसानों के बारे में भी बताया कि थाई मांगुर न केवल इंसानों बल्कि अन्य जलीय जीवों के लिए भी एक काल है। यह मछली स्वभाव से बेहद आक्रामक और मांसाहारी होती है। इसे जिस भी तालाब या नदी में डाला जाता है, यह वहां मौजूद अन्य सभी छोटी-बड़ी स्थानीय मछलियों को खाकर उनका अस्तित्व खत्म कर देती है। यही वजह है कि देश भर के जलस्रोतों और जलीय पर्यावरण को बचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने इसके पालन, परिवहन और बिक्री पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है।

तस्करी के पीछे के सिंडिकेट पर उठे सवाल

इस बड़ी खेप के पकड़े जाने के बाद अब इलाके में कई गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। सख्त सरकारी पाबंदी और पुलिस की लगातार चेकिंग के बावजूद आखिर किसके संरक्षण में और किसकी मिलीभगत से प्रतिबंधित थाई मांगुर का यह काला कारोबार इतने बड़े पैमाने पर फल-फूल रहा है? बंगाल की सीमा से लेकर पूर्णिया के भीतर तक ट्रकों का सुरक्षित पहुंच जाना एक बड़े सिंडिकेट की ओर इशारा करता है। स्थानीय बुद्धिजीवियों और लोगों का कहना है कि सिर्फ मछली नष्ट करना काफी नहीं है, बल्कि इसके पीछे काम कर रहे मुख्य माफियाओं को बेनकाब करना बेहद जरूरी है।

अंकित की रिपोर्ट