Bihar Saran cleanliness: जनसहयोग की रौशनी बनी मिसाल , सारण के इस गांव में लोगों की भागीदारी से चमकी स्वच्छता की तस्वीर

Bihar Saran cleanliness: बिहार के सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड ने साफ-सफाई और जनभागीदारी की एक उम्दा मिसाल कायम की है।...

Bihar Saran cleanliness:  जनसहयोग की रौशनी बनी मिसाल , सारण
जनसहयोग की रौशनी बनी मिसाल- फोटो : IPRD

Bihar Saran cleanliness: बिहार के सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड ने साफ-सफाई और जनभागीदारी की एक उम्दा मिसाल कायम की है। यहां के बाशिंदों ने मिलकर अपने गांव को सुरक्षित और साफ-सुथरा रखने का बीड़ा उठाया है। किसी भी देश, राज्य या इलाके की तरक्की में वहां के लोगों का किरदार बेहद अहम होता है, और इसी फलसफे को अमलीजामा पहनाते हुए इस गांव के लोग स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं।

जनभागीदारी और यूजर चार्ज का निजाम

इस बेहतरीन व्यवस्था के तहत गांव के हर घर से रोजाना महज एक रुपया यानी महीने के 30 रुपये 'यूजर चार्ज'  के तौर पर जमा किए जाते हैं। इस छोटी सी रकम से जो फंड इकट्ठा होता है, उसका इस्तेमाल सफाई कर्मचारियों की हौसला-अफजाई और उनके लिए जरूरी साजो-सामान का बंदोबस्त करने में किया जाता है। इस रकम से ई-रिक्शा, पैडल रिक्शा और कर्मियों के लिए ग्लव्स व जैकेट जैसी बुनियादी चीजें खरीदी जाती हैं, ताकि उनका काम आसान हो सके।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सत्यम सिंह इस सिलसिले में बताते हैं, "हमारे कारकुन आपसे हर रोज एक रुपये के हिसाब से शुल्क लेते हैं।  हम न सिर्फ सफाई कर्मियों को इंसेंटिव दे पाते हैं, बल्कि उनके फटे हुए ग्लव्स, जैकेट और गाड़ियों की मरम्मत का खर्च भी उठाते हैं। इससे गांव की व्यवस्था बदस्तूर और बेहतर तरीके से चल रहा है।"

लोगों की बेमिसाल भागीदारी

इस मुहिम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि ग्रामीण अपनी जिम्मेदारी बखूबी समझ रहे हैं। लोग अपने घरों से निकलने वाले कूड़े-कचरे को गीला और सूखा अलग-अलग करके सफाई अमले को सौंपते हैं। पैसा देने के बाद उन्हें कायदे से रसीद भी दी जाती है, जिससे इस निजाम में पूरी पारदर्शिता बनी रहती है।गांव के निवासी रमेश राय ने बताया, "हमारे दरवाजे पर रोज गाड़ी आती है और हम कचरा अलग करके उन्हें सौंप देते हैं। हम खुशी-खुशी हर महीने का तयशुदा शुल्क अदा करते हैं और उसकी रसीद भी लेते हैं।"

एक नया पैगाम

सारण के इस गांव की यह पहल यह साबित करती है कि किसी भी इलाके को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी सिर्फ हुकूमत या महकमे की नहीं है, बल्कि हर शहरी और ग्रामीण का फर्ज है कि वह इसमें अपना हाथ बंटाए। सामूहिक कोशिशों और आपसी  समन्वय की एक खूबसूरत, सेहतमंद और रोशन भविष्य की शुरुआत है।