Bihar ICDS Transfer: सीवान ICDS ट्रांसफर में बड़ा खेल? 14 साल से एक ही जगह जमे कर्मी को फिर वहीं पोस्टिंग, विभागीय नियमों पर उठे गंभीर सवाल

Bihar ICDS Transfer: सीवान के आईसीडीएस में जारी ताजा तबादला सूची ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।...

Siwan ICDS Transfer Row Staff Reposted
ICDS ट्रांसफर में बड़ा खेल? - फोटो : reporter

Bihar ICDS Transfer: बिहार में तबादला-पोस्टिंग को प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का अहम जरिया माना जाता है, लेकिन सीवान के आईसीडीएस (समेकित बाल विकास सेवा) में जारी ताजा तबादला सूची ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि सरकार के उस स्पष्ट नियम को दरकिनार कर दिया गया, जिसके तहत किसी भी अधिकारी या कर्मी को तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही स्थान पर नहीं रखा जाना चाहिए। इसके बावजूद कुछ कर्मियों को वर्षों से एक ही क्षेत्र में बनाए रखने के साथ-साथ फिर वहीं पदस्थापित या अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया।

जिला पदाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय के हस्ताक्षर से जारी आदेश संख्या 797 और 799 (दिनांक 27 जून 2026) के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि क्या यह तबादला केवल औपचारिकता बनकर रह गया और वास्तविक उद्देश्य कहीं पीछे छूट गया।

आदेश के मुताबिक, क्लर्क प्रियरंजन गिरी, जो करीब पांच वर्षों से जिला प्रोग्राम कार्यालय में कार्यरत और अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें एक बार फिर उसी कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया गया। इसी तरह सांख्यिकी सहायक जय प्रकाश प्रसाद, जो लगभग सात वर्षों से लकड़ी नबीगंज और गोरेयाकोठी में पदस्थापित एवं अतिरिक्त प्रभार में रहे, उन्हें फिर लकड़ी नबीगंज में पदस्थापित करते हुए गोरेयाकोठी का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। वहीं श्याम सुंदर सिंह को भी दोबारा जिला प्रोग्राम कार्यालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने से सवाल और गहरे हो गए।

सबसे अधिक चर्चा सांख्यिकी सहायक शिवपुकार यादव को लेकर है। विभागीय अभिलेखों के अनुसार उनकी वर्ष 2012 में हुसैनगंज में पदस्थापना हुई थी। इसके बाद नियमित पदस्थापन और अतिरिक्त प्रभार के माध्यम से वे लगभग 14 वर्षों से उसी क्षेत्र से जुड़े रहे। वर्ष 2022 में उनका स्थानांतरण आंदर किया गया था, लेकिन हुसैनगंज का अतिरिक्त प्रभार उनके पास ही बना रहा। अब नए आदेश में उन्हें फिर हुसैनगंज में पदस्थापित करते हुए आंदर का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिले में 19 प्रखंड हैं, तो आखिर एक ही कर्मी को वर्षों तक एक ही क्षेत्र में रखने की वजह क्या है?

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि तबादला सूची जारी होने से पहले मनचाही पोस्टिंग को लेकर विभाग के भीतर लंबी कवायद और मोलभाव चलता रहा। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि इन दावों में सच्चाई पाई जाती है, तो पूरी तबादला प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

इस पूरे मामले में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी तरणी कुमारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि स्थानांतरण प्रस्ताव तैयार करते समय वास्तविक पदस्थापन और अतिरिक्त प्रभार का पूरा विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों पर उनका पक्ष नहीं मिल सका। उनसे कार्यालय और सरकारी मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।ध्यान देने योग्य तथ्य: इस मामले में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष और विभागीय जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट- ताबिश इरशाद