कानून के रखवाले ही निकले चोर! मालखाने से कफ सिरप चोरी, थानाध्यक्ष निलंबित, 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार
सुपौल के प्रतापगंज थाने के मालखाने से जब्त की गई 6,162 बोतल कोडीन कफ सिरप को खुद पुलिसकर्मियों ने ही चोरी-छिपे बेच दिया। डीजीपी से शिकायत के बाद हुई जांच में पोल खुली, जिसके बाद थानाध्यक्ष निलंबित और 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार कर जेल भेज दिए गए हैं।
बिहार के सुपौल जिले के प्रतापगंज थाने से कानून के रखवालों द्वारा ही कानून की धज्जियां उड़ाने का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां थाना परिसर के मालखाने से भारी मात्रा में जब्त प्रतिबंधित कोडीन कफ सिरप चोरी-छिपे नशेड़ियों को बेचने के आरोप में चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। खुद खाकी वर्दी धारकों द्वारा किए गए इस शर्मनाक कृत्य और पुलिसकर्मियों की इस आपराधिक मिलीभगत के उजागर होने के बाद से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।
डीजीपी की पहल और विशेष टीम की त्वरित कार्रवाई
इस बड़े गड़बड़झाले की गुप्त शिकायत सीधे पुलिस महानिदेशक (DGP) से किए जाने के बाद, सुपौल एसपी ने मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष त्रि-सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था। पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) की अध्यक्षता वाली इस टीम में वीरपुर एसडीपीओ सुरेंद्र कुमार और साइबर डीएसपी गौरव गुप्ता शामिल थे। जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं और चोरी की पुष्टि होने के तुरंत बाद प्रतापगंज के थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया, वहीं संलिप्त चार अन्य पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
मालखाने से 6162 बोतल कफ सिरप का गायब होना
जांच समिति द्वारा सौंपी गई संयुक्त रिपोर्ट के मुताबिक, एक पूर्व मामले (कांड संख्या-216/25) में कुल 7560 बोतल कोडीन कफ सिरप जब्त कर मालखाने में सुरक्षित रखी गई थी। नियमानुसार एफएसएल (FSL) जांच के लिए 8 बोतलें भेजने के बाद वहां कुल 7552 बोतलें मौजूद होनी चाहिए थीं, लेकिन जांच के दौरान मौके पर महज 1390 बोतलें ही बरामद हुईं। इस प्रकार पुलिसकर्मियों ने आपसी सांठगांठ से रिकॉर्ड में दर्ज भारी-भरकम स्टॉक से 6162 बोतल कफ सिरप गायब कर बाजार में खपा दी थी।
पोल खुलने के डर से बदला गया नकली स्टॉक
पकड़े जाने के डर से और अपनी इस बड़ी हेराफेरी को छिपाने के लिए आरोपितों ने मालखाने में चालाकी से 2842 ऐसी बोतलें लाकर रख दीं, जो वर्ष 2026 में निर्मित थीं। यह नया स्टॉक पुलिस की जब्ती सूची में दर्ज मूल ब्रांड और बैच नंबर से बिल्कुल अलग पाया गया। इससे यह साफ जाहिर हो गया कि जांच को गुमराह करने और सरकारी रिकॉर्ड की लीपापोती करने के उद्देश्य से तस्करों के जरिए बाजार से खरीदकर नया माल वहां डंप किया गया था ताकि गिनती पूरी दिखाई जा सके।
जब्त वाहनों के कीमती पार्ट्स और लूट की बाइक का सौदा
जांच टीम की छानबीन में यह भी सामने आया कि पूर्व थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार के कार्यकाल में केवल कफ सिरप ही नहीं, बल्कि थाने में जब्त किए गए ट्रैक्टर का डायनमो, टायर और बैटरी तथा एक टोटो की बैटरी भी अवैध रूप से बेच दी गई थी। इतना ही नहीं, 6 मई को एक बड़े लूट कांड से जुड़ी अपाचे बाइक को थाना परिसर लाने के बावजूद थानाध्यक्ष द्वारा उसे बिना कानूनी प्रक्रिया के छोड़ दिया गया था। उन पर मामलों के अवैध शमन (सेटलमेंट) और सरकारी अभिलेखों के संधारण में गंभीर त्रुटियां करने के सभी आरोप सत्य पाए गए हैं।
सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज को किया डिलीट
जब जांच समिति ने प्रतापगंज थाने के सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की गहराई से पड़ताल की, तो एक और चौंकाने वाला सच सामने आया कि मुख्य कैमरे का 28 मई से पहले का पूरा डेटा और फुटेज जानबूझकर डिलीट कर दिया गया था ताकि चोरी का कोई डिजिटल सबूत हाथ न लग सके। इस कृत्य को घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण मानते हुए थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से सामान्य जीवन-यापन भत्ता पर निलंबित कर उनका मुख्यालय पुलिस केंद्र, सुपौल निर्धारित कर दिया गया है।
चौकीदार की लाइजनिंग और रात 12 बजे की डीलिंग
दिसंबर 2023 में अनुकंपा के आधार पर नियुक्त हुए चौकीदार राहुल कुमार ने अपनी लिखित स्वीकारोक्ति में कबूला है कि उसने अपने साथियों—अग्निशमन सिपाही रंजन राज, चालक मनीष कुमार और डायल 112 के चालक अखिलेश कुमार के साथ मिलकर यह गिरोह बनाया था। जब नियमित थानाध्यक्ष अपनी बहन की शादी में छुट्टी पर बाहर गए थे, तब ये चारों रोज रात 12 बजे मालखाने से कफ सिरप निकालकर एक स्थानीय तस्कर को सप्लाई करते थे। कफ सिरप, शराब व गाड़ियों के पार्ट्स बेचकर मिले पैसों को ये चारों आपस में बराबर बांट लेते थे।
एनडीपीएस और चोरी की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज
सुपौल के एसपी शरथ आरएस ने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्राथमिक जांच में गंभीर लापरवाही और चोरी की बात पुख्ता होने के बाद थानाध्यक्ष को निलंबित किया गया है और सभी चारों आरोपी कर्मियों के खिलाफ एनडीपीएस (NDPS) एक्ट तथा चोरी की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आगे के अनुसंधान के आधार पर विभाग के भीतर अन्य संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट