सुपौल के कर्णपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, 'नालसा संवाद योजना' से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने पर जोर

सुपौल के कर्णपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन, 'नाल
सुपौल के कर्णपुर में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा), नई दिल्ली और बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर रविवार को सुपौल के कर्णपुर में एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिला विधिक सेवा प्राधिकार, सुपौल के सचिव मो. अफजल आलम के कुशल दिशा-निर्देशन और मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और वंचित समुदायों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति सचेत करना रहा. इस दौरान ग्रामीणों को मुफ्त कानूनी सहायता और नालसा संवाद योजना की बारीकियों से अवगत कराया गया.


हाशिए पर खड़े आदिवासी और खानाबदोश समुदायों को न्याय दिलाना योजना का मुख्य लक्ष्य

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पैनल अधिवक्ता शक्ति कुमारी सारिका ने नालसा संवाद योजना के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि इस योजना का मुख्य फोकस समाज के अंतिम पायदान पर खड़े कमजोर, आदिवासी और खानाबदोश समुदायों को न्याय की मुख्यधारा से जोड़ना है. जो लोग आर्थिक तंगी या सामाजिक पिछड़ेपन के कारण अदालतों तक नहीं पहुंच पाते, उन्हें इस योजना के जरिए उनके घर पर ही विधिक सहायता दी जाती है.


दूर-दराज के क्षेत्रों में तैनात रहेंगे प्रशिक्षित अधिवक्ता और पारा विधिक स्वयंसेवक

पैनल अधिवक्ता ने बताया कि इस तंत्र को मजबूत करने के लिए दूर-दराज और जरूरतमंद इलाकों में प्रशिक्षित स्थानीय पैनल वकीलों और अर्ध-कानूनी (पारा विधिक) स्वयंसेवकों की तैनाती की जाती है. इसके तहत प्रत्येक तालुका स्तर पर संबंधित कमजोर समुदायों की पहचान की जाती है और उनके लिए बकायदा एक वार्षिक कार्य योजना तैयार की जाती है. यह विशेष संवाद इकाइयां स्थानीय स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझकर उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में सीधे काम करती हैं.


भूमि-वन अधिकार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मिलेगी मदद

अक्सर जानकारी के अभाव में गरीब वर्ग के लोग अपने अधिकारों से वंचित रह जाते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस योजना के अंतर्गत मुख्य रूप से भूमि अधिकार, वन अधिकार, विस्थापन और पुनर्वास, आवश्यक सरकारी दस्तावेजों की उपलब्धता, सामाजिक सुरक्षा और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मुफ्त कानूनी सहायता दी जाती है. अधिवक्ता ने ग्रामीणों से अपील की कि वे डरें नहीं, बल्कि किसी भी कानूनी उलझन के समाधान के लिए सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकार से संपर्क साधें.


टोल फ्री नंबर 15100 पर भी मिल सकती है तुरंत सलाह, आगे भी जारी रहेंगे अभियान

कार्यक्रम के अंत में ग्रामीणों को बताया गया कि वे किसी भी प्रकार की विधिक सहायता या कानूनी सलाह के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 15100 पर कभी भी संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा सुपौल स्थित कार्यालय से भी सीधे मदद ली जा सकती है. इस मौके पर पारा विधिक स्वयंसेवक मो. मोअज्जम और मो. निजाम सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. 


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट