नेपाल की बेटी, बिहार की चेयरमैन, 7 साल तक शिक्षिका बनकर की नौकरी, अब नगर परिषद की सरकार चला रही, विदेशी नागरिकता और फर्जी डिग्री का हुआ भंडाफोड़

एक नेपाली महिला द्वारा फर्जी तरीके से भारतीय नागरिक बनकर पहले शिक्षिका की नौकरी और फिर नगर परिषद चेयरमैन बनने का बड़ा मामला सामने आया है। मतदाता सूची से नाम कटने के बाद भी आरोपी महिला पद पर काबिज है।

नेपाल की बेटी, बिहार की चेयरमैन, 7 साल तक शिक्षिका बनकर की न

Supaul - कोसी अंचल में भ्रष्टाचार की एक ऐसी धारा बह रही है जिसमें नियम, कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज भी 'जुगाड़' के आगे बौने साबित हो रहे हैं। सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज नगर परिषद की चेयरमैन संगीता कुमारी पर एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। आरटीआई कार्यकर्ता और जनसुराज नेता अनिल कुमार सिंह ने दस्तावेजों के साथ दावा किया है कि संगीता कुमारी मूल रूप से नेपाली नागरिक हैं और उन्होंने बिना भारतीय नागरिकता प्राप्त किए न केवल सरकारी नौकरी की, बल्कि वर्तमान में चेयरमैन के पद पर भी काबिज हैं। 

फर्जीवाड़े की पांच बड़ी परतें:


1. नेपाल की नागरिकता और फर्जी पहचान: 

जांच के अनुसार, संगीता कुमारी मूल रूप से नेपाल के सप्तरी जिला (इनरवा) निवासी सुरैत यादव की पुत्री हैं। उनकी शादी त्रिवेणीगंज के पूर्व मुखिया विजेंद्र यादव से हुई। भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत उन्होंने नागरिकता के लिए कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं की, फिर भी वे भारतीय जनप्रतिनिधि बन गईं।

2. पति को ही बना दिया 'पिता': 

हैरानी की बात यह है कि त्रिवेणीगंज अंचलाधिकारी द्वारा जारी जाति और निवास प्रमाण पत्र में संगीता ने अपने पति विजेंद्र यादव को ही अपना पिता दर्शाया है, ताकि स्थानीय दस्तावेज आसानी से बन सकें।

3. दूसरे के सर्टिफिकेट पर 7 साल तक शिक्षिका की नौकरी: 

आरोप है कि संगीता ने मधुबनी जिले की एक अन्य संगीता कुमारी (पिता- महेंद्र यादव) के मैट्रिक और इंटर के प्रमाण पत्रों का उपयोग किया। इसी आधार पर उन्होंने प्राथमिक विद्यालय पहलवाना (महेशुआ) में 2 मई 2015 से 6 सितंबर 2022 तक पंचायत शिक्षक के रूप में वेतन उठाया। चेयरमैन का चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने शिक्षक पद से त्यागपत्र दिया था।

4. न्यायालय को गुमराह करना: 

संगीता ने कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र देकर उन सर्टिफिकेट्स को अपना बताया जो असल में मधुबनी की एक अन्य महिला के हैं, जो वर्तमान में खुद खजौली (मधुबनी) में शिक्षिका हैं।

5. मतदाता सूची से नाम कटा, फिर भी कुर्सी पर बरकरार

 एसआईआर (SIR) 2025 की जांच में भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं देने के कारण निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर 2025 को संगीता कुमारी का नाम मतदाता सूची से डिलीट कर दिया है। इसके बावजूद वे नगर परिषद की चेयरमैन बनी हुई हैं, जो एक बड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है।

आरटीआई कार्यकर्ता की मांग

भ्रष्टाचार मुक्त जागरूकता अभियान के संयोजक अनिल कुमार सिंह ने इस पूरे मामले की शिकायत चुनाव आयोग और जिला प्रशासन से की है। उन्होंने मांग की है कि: संगीता कुमारी को अविलंब चेयरमैन पद से बर्खास्त किया जाए। साथ ही 7 साल तक उठाए गए सरकारी वेतन की वसूली की जाए। वहीं फर्जी दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी के मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजा जाए।

रिपोर्ट - विनय कुमार मिश्रा