हिंदी दिवस पर समाहरणालय में संगोष्ठी और काव्य पाठ आयोजित, कवियों व शिक्षकों ने दिया नारी सशक्तिकरण व सामाजिक समरसता का संदेश
Supaul : हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, राजभाषा के रूप में इसके महत्व और साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को समाहरणालय परिसर में हिंदी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। जिलाधिकारी सावन कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में संगोष्ठी, व्याख्यान एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत जिलाधिकारी सावन कुमार, उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार, अपर समाहर्ता मो. तारिक और सच्चिदानंद सुमन सहित अन्य वरीय अधिकारियों एवं स्थानीय साहित्यकारों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर की गई।
साहित्य के माध्यम से व्यक्तित्व विकास और आज के परिवेश में प्रासंगिकता
अपने अध्यक्षीय संबोधन में जिलाधिकारी सावन कुमार ने कहा कि हिंदी साहित्य केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए जीवन के गूढ़ दर्शन और व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास को आसानी से समझा जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के आधुनिक परिवेश में आवश्यकता इस बात की है कि हिंदी भाषा और साहित्य को वर्तमान परिस्थितियों के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक बनाया जाए। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी में अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव और सम्मान की भावना पैदा होती है।
कवियों की प्रस्तुति: नारी शक्ति से लेकर सामाजिक सद्भाव तक का संदेश
कार्यक्रम के दौरान जिले के प्रबुद्ध साहित्यकारों और शिक्षकों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कई ज्वलंत मुद्दों को उठाया। निखिलेश कुमार सिंह ने राजभाषा हिंदी की उपयोगिता पर विचार रखे, जबकि मध्य विद्यालय डभारी की शिक्षिका साधना अग्रहरि ने 'चेतना का अस्तित्व' कविता के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को रेखांकित किया। वहीं शिक्षिका कल्याणी स्वरूपा ने अपनी कविता 'प्यार के लिए ही तो...' से समाज में बढ़ रही दूरियों को मिटाकर आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। इसके अलावा दयानंद भारती, गुंजन झा और रविभूषण कुमार ने भी सामाजिक सरोकारों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
डीएम और डीडीसी को भेंट की गई 'अंदाज जिंदगी के' पुस्तक
काव्य पाठ के समापन अवसर पर शिक्षिका व कवयित्री कल्याणी स्वरूपा ने अपने काव्य संग्रह 'अंदाज जिंदगी के' की प्रति जिलाधिकारी सावन कुमार और उप विकास आयुक्त इन्द्रवीर कुमार को ससम्मान भेंट की। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी इस साहित्यिक उपलब्धि की सराहना की और जिले में रचनात्मक एवं साहित्यिक गतिविधियों को लगातार बढ़ावा देने की बात कही। उपस्थित रचनाकारों ने समाज में मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं को जीवित रखने के लिए साहित्य को सबसे सशक्त माध्यम बताया।
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का सफल समापन
इस गरिमामय समारोह में जिला पंचायत राज पदाधिकारी गयानंद यादव, विशेष कार्य पदाधिकारी (गोपनीय शाखा) विकास कुमार कर्ण, प्रभारी पदाधिकारी (सामान्य शाखा) समेत जिला प्रशासन के कई अन्य पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। जिलाधिकारी ने सभी आगंतुक कवियों और वक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम के समापन की औपचारिक घोषणा की। पूरे आयोजन ने हिंदी भाषा की समृद्धि, साहित्यिक चेतना और सामाजिक समरसता का एक सकारात्मक संदेश दिया।
विनय कुमार मिश्रा की रिपोर्ट