भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की बड़ी कार्रवाई, प्राचीन व पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों के साथ नेपाली तस्कर गिरफ्तार

भारत-नेपाल सीमा पर एसएसबी की बड़ी कार्रवाई, प्राचीन व पुराता
प्राचीन मूर्तियों के साथ नेपाली तस्कर गिरफ्तार- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात 45वीं वाहिनी, सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) बीरपुर के तहत सीमा चौकी कुनौली की टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। एसएसबी जवानों ने सीमा पर प्रभावी निगरानी और जांच के दौरान प्राचीन एवं पुरातात्विक महत्व की बहुमूल्य मूर्तियों के साथ एक व्यक्ति को रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई शनिवार, 30 मई को प्रातः लगभग 07:15 बजे उस समय हुई, जब भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर अवैध तस्करी और संदिग्ध गतिविधियों की रोकथाम के लिए विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान एक व्यक्ति नेपाल की तरफ से पीले रंग के कपड़े में कुछ सामान लपेटकर भारतीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहा था।


संदिग्ध आचरण देख सुरक्षा बलों ने की घेराबंदी, आरोपी नेपाल का निवासी

ड्यूटी पर तैनात सतर्क बलकर्मियों को देखकर उक्त व्यक्ति अचानक घबरा गया और अपनी राह बदलकर तेजी से आगे भागने का प्रयास करने लगा। उसकी इस संदिग्ध गतिविधि को देखते हुए सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाई और घेराबंदी कर उसे रोक लिया। कड़ाई से की गई शुरुआती पूछताछ में उसने अपनी पहचान रामचंद्र मुखिया के रूप में दी, जो नेपाल के जिला सप्तरी अंतर्गत ग्राम सकरपुरा का निवासी है। इसके बाद सुरक्षा बलों ने गवाहों की मौजूदगी में उसके पास मौजूद पीले कपड़े के पोटली की गहन तलाशी शुरू की।


पोटली से बरामद हुईं भगवान कृष्ण, राधा और गाय की प्राचीन मूर्तियां

तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से भारी और धातु निर्मित कई सामग्रियां बरामद हुईं, जो धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की हैं। बरामद वस्तुओं में धातु की बनी भगवान श्रीकृष्ण की एक मूर्ति (लगभग 26 सेंटीमीटर लंबी, जो क्षतिग्रस्त है), राधा जी की एक मूर्ति (लगभग 23 सेंटीमीटर लंबी), धातु की ही बनी एक गाय की आकृति (लगभग 15 सेंटीमीटर लंबी, यह भी क्षतिग्रस्त है) तथा एक धातु निर्मित आसन/प्लेट (लगभग 18 सेंटीमीटर लंबी) शामिल हैं। प्रारंभिक तौर पर ये सभी वस्तुएं प्राचीन काल की और पुरातात्विक धरोहर जैसी प्रतीत हो रही हैं।


नदी किनारे मिली थीं मूर्तियां, भारत में बेचने की थी योजना

पूछताछ के दौरान गिरफ्तार आरोपी रामचंद्र मुखिया ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि उसे ये सभी मूर्तियां नेपाल की तिरजुगा नदी के किनारे मिली थीं। वह इन बहुमूल्य मूर्तियों की शुद्धता व काल की जांच कराने और इन्हें ऊंचे दामों पर भारत के बाजार में बेचने के उद्देश्य से सीमा पार ला रहा था। हालांकि, जब एसएसबी के अधिकारियों ने उससे इन ऐतिहासिक वस्तुओं के स्वामित्व, अंतरराष्ट्रीय परिवहन अथवा खरीद-बिक्री से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे, तो वह कोई भी कागजात प्रस्तुत करने में पूरी तरह असमर्थ रहा।


अग्रिम कार्रवाई के लिए सीमा शुल्क कार्यालय कुनौली को किया सुपुर्द

वैध दस्तावेजों के अभाव और तस्करी के संदेह को देखते हुए एसएसबी ने सभी मूर्तियों और सामग्री को विधिवत जब्त कर लिया। आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद गिरफ्तार तस्कर और बरामद सामान को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए लैंड कस्टम्स स्टेशन (LCS) यानी स्थल सीमा शुल्क कार्यालय, कुनौली को सौंप दिया गया है। मामले की पुष्टि करते हुए द्वितीय कमान अधिकारी जगदीश कुमार शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा और सीमा पर अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए एसएसबी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस सफल ऑपरेशन में निरीक्षक चमन सिंह सहित अन्य एसएसबी कार्मिकों की मुख्य भूमिका रही।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट