Bihar Flood: CM के सामने दुल्हन सा सजा राहत शिविर, जाते ही मवेशियों चोकर गायब, रात में एंबुलेंस से हटाने का वीडियो वायरल होते हीं मचा हड़कंप

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की तबाही के बीच हाजीपुर से राहत व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ...

Hajipur Flood Camp Row Cattle Feed Removed After CM Visit
बाढ़ की कड़वी हकीकत- फोटो : reporter

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ की तबाही के बीच हाजीपुर से राहत व्यवस्था को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निरीक्षण से पहले बाढ़ राहत शिविर को दुल्हन की तरह सजाया गया, लेकिन मुख्यमंत्री के जाते ही कुछ ही घंटों में कथित तौर पर कई इंतजाम समेट लिए गए। इसी बीच रात के अंधेरे में एंबुलेंस से मवेशियों का चोकर हटाए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दरअसल, गंगा और गंडक नदियों के बढ़े जलस्तर ने हाजीपुर के बड़े इलाके को प्रभावित किया है। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर गंगा ब्रिज थाना के सामने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर बनाया गया। मुख्यमंत्री के संभावित निरीक्षण को लेकर शिविर में बिजली, सड़क, रहने की व्यवस्था, पशुओं के लिए चारा, लोगों के भोजन, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई तक के इंतजाम किए गए।

दावा है कि मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले शिविर में तमाम व्यवस्थाएं मुकम्मल दिखाई दे रही थीं। बाढ़ पीड़ितों और उनके मवेशियों के लिए जरूरी सामान भी उपलब्ध कराया गया था। लेकिन आरोप है कि मुख्यमंत्री के शिविर से निकलते ही व्यवस्था की तस्वीर बदलने लगी।सोशल मीडिया पर वायरल कथित वीडियो में रात के अंधेरे में एक एंबुलेंस के जरिए मवेशियों का चोकर ले जाते कुछ लोग दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा कि अगर चोकर बाढ़ पीड़ितों के पशुओं के लिए उपलब्ध कराया गया था, तो उसे रात में एंबुलेंस से बाहर क्यों ले जाया जा रहा था?

मामले को लेकर पत्रकारों ने एंबुलेंस चालक से सवाल किया। चालक ने कथित तौर पर डीएचओ से फोन पर बात कराई। वायरल ऑडियो/बातचीत में डीएचओ की ओर से कथित तौर पर यह कहा गया कि चोकर राहत शिविर में मौजूद पशुओं के लिए नहीं था, बल्कि मुख्यमंत्री को दिखाने के लिए लाया गया था।

यदि वायरल बातचीत और वीडियो की पुष्टि होती है, तो यह राहत व्यवस्था की पारदर्शिता पर बेहद गंभीर सवाल खड़ा करता है। बाढ़ जैसी आपदा में जहां हजारों लोग प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहां राहत सामग्री और पशुओं के चारे को लेकर इस तरह के आरोप सामने आना चिंताजनक है।हालांकि, वायरल वीडियो और कथित बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि चोकर किस उद्देश्य से शिविर में लाया गया था और बाद में उसे एंबुलेंस से क्यों हटाया जा रहा था। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर क्या सफाई देता है और राहत शिविर की व्यवस्थाओं को लेकर क्या कार्रवाई होती है।

रिपोर्ट- ऋषभ कुमार