Bihar Flood: काली घाट पर हादसा,गंगा की तेज धार में बहा युवक,मचा हड़कंप
Bihar Flood: गंगा की तेज धारा ने एक व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लिया।काली घाट के पास हुए हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।...
Bihar Flood: वैशाली जिले के देसरी थाना क्षेत्र में गंगा की तेज धारा ने एक व्यक्ति को अपनी चपेट में ले लिया। सुल्तानपुर काली घाट के पास हुए हादसे के बाद घाट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि उमेश पंडित शौच के बाद नदी किनारे हाथ-पैर धो रहे थे, तभी अचानक तेज बहाव में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह देखते ही देखते गंगा की धार में बह गए।घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने शोर मचाया और उमेश पंडित को बचाने की कोशिश की, लेकिन गंगा की तेज धारा के सामने प्रयास कामयाब नहीं हो सका। हादसे की सूचना मिलने के बाद स्थानीय लोग और प्रशासनिक टीम उनकी तलाश में जुट गई। फिलहाल व्यक्ति की तलाश जारी बताई जा रही है।
हादसे के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन की तैयारियों को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का आरोप है कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और नदी में तेज बहाव बना हुआ है, इसके बावजूद संवेदनशील घाटों पर पर्याप्त सुरक्षा और बचाव के इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं।लोगों का कहना है कि घाटों पर सुरक्षा कर्मियों, रेस्क्यू टीम और आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए थी। ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे के बाद तत्काल बचाव अभियान शुरू करने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इससे आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की तैयारियां केवल कागजी कार्रवाई या फोटो तक सीमित दिखाई दे रही हैं। उनका कहना है कि जब नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है और तेज धारा का खतरा लगातार बना हुआ है, तब घाटों पर विशेष निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
मामले में महनार एसडीएम की ओर से बताया गया कि रात के समय प्रशासन की ओर से नाव के संचालन पर रोक रहती है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा कारणों से यह व्यवस्था लागू होने की बात कही गई है।लेकिन इसी व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि रात के समय नाव संचालन पर रोक है और गंगा में तेज बहाव पहले से मौजूद है, तो संवेदनशील घाटों पर किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक रेस्क्यू व्यवस्था क्यों नहीं तैयार रखी गई?ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे ऐसे स्थानों पर रात के समय विशेष निगरानी, प्रशिक्षित बचाव दल और आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि किसी हादसे की स्थिति में तत्काल कार्रवाई हो सके।उमेश पंडित की तलाश के लिए स्थानीय लोग और प्रशासनिक टीम प्रयास कर रही है। हादसे के बाद गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियां एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई हैं।
बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के दौरान लोगों को घाटों से दूर रखने के लिए प्रशासन की ओर से चेतावनी और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है, यह भी बड़ा सवाल है। ऐसे समय में घाटों पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और आपातकालीन रेस्क्यू सिस्टम बेहद अहम हो जाता है।फिलहाल उमेश पंडित की तलाश जारी है और परिजन तथा स्थानीय लोग किसी सकारात्मक खबर का इंतजार कर रहे हैं। इस घटना ने प्रशासन के सामने एक गंभीर चुनौती भी रख दी है गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच घाटों पर सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था को किस तरह और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
रिपोर्ट- ऋषभ कुमार