अइसे जनी रुपवा निहारे ऐ बलम हमारा लाज लागेला...गाने पर जमकर ठुमके लागाईं चिकित्सा पदाधिकारी,अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी का भोजपुरी गीत पर डांस करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे
Bihar Health Department: बिहार के वैशाली जिले में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की चिकित्सा पदाधिकारी का भोजपुरी गीत पर डांस करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सरकारी अस्पताल की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वीडियो के वायरल होने और उसमें दिखाई दे रहे कार्यक्रम की परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो करीब दो दिन पुराना है और वैशाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आधिकारिक मीटिंग हॉल में आयोजित सावन महोत्सव के दौरान का है। कार्यक्रम में पीएचसी की चिकित्सा पदाधिकारी सीमा सरोज भोजपुरी गीत ‘अईसे जनी रूपवा निहारअ ए बलम, हमरा लाज लागेला’ की धुन पर नृत्य करती नजर आ रही हैं।
वायरल वीडियो में मीटिंग हॉल के भीतर स्वास्थ्य विभाग से संबंधित एक आधिकारिक पोस्टर भी दिखाई दे रहा है। इसी पोस्टर के सामने चिकित्सा पदाधिकारी को भोजपुरी गीत पर डांस करते देखा जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से इस पूरे दृश्य को रिकॉर्ड किया और बाद में सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इसके बाद वीडियो तेजी से वायरल होने लगा।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं। कुछ लोग इसे सावन महोत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रम का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने सरकारी अस्पताल के आधिकारिक परिसर में ऐसे आयोजन और चिकित्सा पदाधिकारी की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि वैशाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो चिकित्सकों दीपक कुमार और सीमा सरोज की तैनाती है। वहीं, स्थानीय लोगों की ओर से पीएचसी में इमरजेंसी मरीजों को तत्काल सेवा नहीं मिलने का आरोप भी लगाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
वायरल वीडियो को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकारी स्वास्थ्य संस्थान के मीटिंग हॉल में सावन महोत्सव जैसा सांस्कृतिक कार्यक्रम विभागीय अनुमति और निर्धारित नियमों के तहत आयोजित किया गया था? यदि कार्यक्रम आधिकारिक था, तो इसकी जिम्मेदारी और आयोजन की प्रक्रिया भी स्पष्ट होनी चाहिए।
बिहार सरकार की ओर से सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने, डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और अस्पतालों की व्यवस्था पर निगरानी बढ़ाने की बात लगातार कही जाती रही है। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के मीटिंग हॉल का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर बहस छिड़ गई है।हालांकि सावन महोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीत-संगीत या नृत्य होना अपने आप में असामान्य नहीं है। लेकिन जब आयोजन सरकारी अस्पताल के परिसर में हो और उसमें तैनात अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए, तो कार्यक्रम की अनुमति, समय और उद्देश्य को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच का इंतजार करना जरूरी है। यदि विभागीय स्तर पर जांच होती है तो इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्यक्रम किन परिस्थितियों में आयोजित हुआ था और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ।
वायरल वीडियो ने एक ओर सावन महोत्सव के आयोजन को चर्चा में ला दिया है, तो दूसरी ओर वैशाली पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग इस मामले को लेकर क्या संज्ञान लेता है और वायरल वीडियो के साथ लगाए जा रहे दावों की वास्तविकता क्या सामने आती है।
रिपोर्ट-ऋषभ कुमार