आयकर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव: हर साल चुनें नया या पुराना टैक्स रेजीम!

भारत में आयकर प्रणाली में अहम बदलाव किए गए हैं, जिसके तहत अब करदाताओं के पास हर साल नया और पुराना टैक्स रेजीम चुनने का विकल्प होगा। वित्तीय वर्ष 2023-24 से लागू हुए इस बदलाव का उद्देश्य कर प्रणाली को सरल बनाना और करदाताओं को अधिक लचीलापन देना है। यह विकल्प मुख्य रूप से वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है, जो हर साल बिना किसी रोक-टोक के दोनों रेजीमों के बीच चयन कर सकते हैं, बशर्ते यह चयन आयकर रिटर्न दाखिल करने की नियत तारीख से पहले किया जाए।
क्या है नया बदलाव?
अब नया टैक्स रेजीम डिफ़ॉल्ट विकल्प बन चुका है, यानी यदि करदाता पुराना रेजीम चुनना चाहते हैं, तो उन्हें सक्रिय रूप से उसका चयन करना होगा। यह लचीलापन उन व्यक्तियों के लिए बहुत फायदेमंद होगा जो साल दर साल अपने कर निर्धारण के लिए उपयुक्त विकल्प चुनना चाहते हैं।
हालांकि, जो लोग व्यापार या पेशेवर स्रोतों से आय अर्जित करते हैं, उनके लिए नियम थोड़े सख्त हैं। उन्हें अगर एक बार नया रेजीम छोड़ कर पुराना रेजीम चुन लिया, तो वे केवल एक बार ही फिर से नए रेजीम में लौट सकते हैं। यह विकल्प भी आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि से पहले ही चुनना होगा।
नए और पुराने रेजीम के बीच अंतर
नए टैक्स रेजीम में कर दरें कम हैं, लेकिन इसमें अधिकांश छूट और कटौतियां समाप्त कर दी गई हैं। इसके विपरीत, पुराने टैक्स रेजीम में विभिन्न निवेशों और बीमा प्रीमियम के तहत छूट मिलती है, जैसे कि सेक्शन 80C और 80D में।
नए टैक्स रेजीम के तहत आयकर स्लैब इस प्रकार हैं:
4 लाख रुपये तक: शून्य
4 लाख से 8 लाख रुपये तक: 5%
8 लाख से 12 लाख रुपये तक: 10%
12 लाख से 16 लाख रुपये तक: 15%
16 लाख से 20 लाख रुपये तक: 20%
20 लाख से 24 लाख रुपये तक: 25%
24 लाख रुपये से ऊपर: 30%
इसके अलावा, पुराने टैक्स रेजीम में विभिन्न कटौतियां और छूट का प्रावधान है, जैसे कि सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की कटौती, सेक्शन 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर छूट और हाउस लोन पर ब्याज की छूट।
वेतनभोगियों के लिए लचीलापन
यह नया विकल्प विशेष रूप से वेतनभोगियों के लिए फायदेमंद है क्योंकि वे हर साल अपनी वित्तीय स्थिति के आधार पर उपयुक्त टैक्स रेजीम का चुनाव कर सकते हैं। इससे उन्हें टैक्स बचाने का बेहतर मौका मिलेगा।
क्या करना चाहिए करदाताओं को?
अब करदाताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपने वित्तीय हालात और टैक्स कनेक्शन को ध्यान में रखते हुए किस रेजीम को चुनें। यदि आपके पास निवेश, बीमा या हाउस रेंट अलाउंस जैसी छूटें हैं, तो पुराने रेजीम में रहना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। वहीं, यदि आप कम टैक्स दरों का फायदा लेना चाहते हैं और आपके पास कम छूट हैं, तो नया रेजीम आपके लिए बेहतर हो सकता है।