आर्थिक रफ्तार तेज, महंगाई सुस्त: भारत की GDP को लेकर NSO का बड़ा अनुमान, सर्विस सेक्टर चमका, खेती पिछड़ी
NSO द्वारा जारी 2025-26 के लिए ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) के पहले एडवांस अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास सरकार के पहले के 6.3–6.8% के अनुमान से ज़्यादा होने वाला है।
India GDP : नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) ने कहा कि मार्च 2026 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष (FY26) में भारत की आर्थिक विकास दर बढ़कर 7.4% रहने की उम्मीद है, जो पिछले वर्ष की 6.5% की वृद्धि से अधिक है। यह अनुमान NSO द्वारा जारी 2025-26 के लिए GDP के पहले एडवांस एस्टिमेट में सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में GDP ग्रोथ 8% रही है। NSO का कहना है कि FY26 की आर्थिक वृद्धि सरकार के पहले के 6.3–6.8% के अनुमान से बेहतर रहने वाली है।
हालांकि, 2011-12 के स्थिर मूल्यों पर रियल GDP उम्मीद से अधिक रहने का अनुमान है, लेकिन मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल GDP ग्रोथ अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती है। FY26 में नॉमिनल GDP ग्रोथ 8% रहने का अनुमान है, जो बजट के 10.1% के अनुमान और पिछले साल के 10.4% के स्तर से कम है। रियल और नॉमिनल GDP ग्रोथ के बीच का अंतर इस वित्त वर्ष में केवल 60 बेसिस पॉइंट (0.60%) रहने का अनुमान है, जो 2011-12 के बाद सबसे कम है। इसकी प्रमुख वजह कम महंगाई है। NSO के अनुसार, इस वर्ष थोक (WPI) और खुदरा (CPI) महंगाई दोनों ही रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास रह सकती हैं।
क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट धर्मकीर्ति जोशी ने कहा कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ तनाव और अनिश्चितता के बावजूद भारत की ग्रोथ बनी हुई है। इसके पीछे अनुकूल मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, सामान्य से बेहतर मानसून और कच्चे तेल की कम कीमतें जैसे सकारात्मक कारक हैं। कम नॉमिनल GDP ग्रोथ का असर सरकार के टैक्स रेवेन्यू पर पड़ सकता है, क्योंकि कर संग्रह मौजूदा कीमतों पर आधारित होता है। यह अहम मैक्रोइकोनॉमिक डेटा यूनियन बजट (1 फरवरी) से कुछ हफ्ते पहले जारी हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार नॉन-टैक्स रेवेन्यू में बढ़ोतरी और खर्च में कटौती के जरिए 4.4% के फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य को हासिल कर सकती है। SBI ग्रुप के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर सौम्या कांति घोष के मुताबिक, टैक्स रेवेन्यू बजट से कुछ कम रह सकता है, लेकिन नॉन-टैक्स रेवेन्यू बेहतर रहने से कुल प्राप्तियों पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। उनके अनुसार, कुल खर्च कम रहने से फिस्कल डेफिसिट 15.85 लाख करोड़ रुपये रह सकता है और GDP के अनुपात में यह 4.4% पर स्थिर रहेगा।
सेक्टरवार देखें तो सर्विसेज सेक्टर की ग्रोथ पिछले साल के 7.2% से बढ़कर FY26 में 9.1% रहने का अनुमान है। सर्विसेज के सभी सब-सेक्टर में तेज़ी दिखने की उम्मीद है। वहीं एग्रीकल्चर सेक्टर में सुस्ती का अनुमान है। रियल ग्रोथ 4.6% से घटकर 3.1% रह सकती है। एग्रीकल्चर और संबद्ध गतिविधियों की नॉमिनल GVA ग्रोथ पिछले साल के 10.4% से गिरकर 0.8% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आने की संभावना है, जिसका कारण खाद्य महंगाई में तेज़ गिरावट है। कम महंगाई से उपभोक्ताओं को राहत मिली है, लेकिन इससे किसानों की आय पर दबाव बढ़ा है।
NSO के मुताबिक, भारत की रियल GDP FY25 के 187.97 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 201.90 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है। वहीं नॉमिनल GDP FY26 में 357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो FY25 में 330.68 लाख करोड़ रुपये थी। इस साल प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय आय में 16,025 रुपये की बढ़ोतरी होकर 2,47,487 रुपये रहने का अनुमान है।