Gold loan: गोल्ड लोन में बूम! RBI रिपोर्ट में खुलासा, एक साल में 128% की जबरदस्त वृद्धि,जानें वजह

Gold loan: RBI की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में गोल्ड लोन में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। जानें क्यों सोने के गहनों पर लोन इतनी तेजी से बढ़ रहा है और किन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा क्रेडिट बढ़ा।

Gold loan
भारत में बढ़ती गोल्ड लोन की डिमांड!- फोटो : social media

 Gold loan: देश भर में गोल्ड लोन लेने वालों की संख्या इतनी तेज़ी से बढ़ रही है कि यह पूरे बैंकिंग सेक्टर में सबसे तेजी से बढ़ने वाला लोन बन गया है। भारतीय रिज़र्व बैंक की ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि अक्टूबर 2025 तक गोल्ड लोन का कुल बकाया 3.38 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया। मार्च 2025 की तुलना में इस अवधि में इसमें जबरदस्त उछाल देखने को मिला और बढ़ोतरी 63 प्रतिशत से भी ज्यादा रही।

सोने पर लोन की मांग क्यों बढ़ी 

आरबीआई की तरफ से मई 2024 में नियमों में किए गए बदलाव ने गोल्ड लोन की मांग को अचानक तेज़ कर दिया। कृषि उपयोग के लिए लिया जाने वाला गोल्ड लोन अब रिटेल गोल्ड लोन की ही गिनती में आने लगा। इस नई व्यवस्था के बाद बैंकिंग सिस्टम में गोल्ड लोन का आंकड़ा लगातार चढ़ता चला गया।इसके अलावा यह ऐसा लोन है जिसके बदले तुरंत नकद राशि मिल जाती है, इसलिए आकस्मिक जरूरतों में लोग इसे सबसे सुरक्षित विकल्प मानकर चुन रहे हैं।

पर्सनल और अन्य सेक्टर के लोन भी तेज़ी से बढ़ रहे हैं

अक्टूबर 2025 में पर्सनल लोन की कुल राशि करीब 64.56 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। घर खरीदने के लिए लिया जाने वाला हाउसिंग लोन भी तेजी से बढ़कर 31.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वाहन खरीदने वाले ग्राहकों में भी उत्साह बना हुआ है और ऑटो लोन लगभग 12 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है। शिक्षा क्षेत्र में भी लोन की मांग बढ़ी है और यह लगभग 1.49 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ये सभी आंकड़े बताते हैं कि ग्राहक सुरक्षित और लंबी अवधि वाले लोन को प्राथमिकता दे रहे हैं।

बिना गारंटी वाले लोन की रफ्तार धीमी

सुरक्षित लोन की बढ़ती लोकप्रियता ने अनसिक्योर्ड लोन की रफ्तार पर सीधा असर डाला। उपभोक्ता सामान खरीदने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में मामूली वृद्धि देखी गई। क्रेडिट कार्ड बकाया और अन्य बिना गारंटी वाले पर्सनल लोन में बढ़त तो हुई, लेकिन पहले जैसी तेजी नहीं रही। बढ़ती महंगाई और अनिश्चितताओं ने लोगों को जोखिम से दूर रहने के लिए मजबूर किया है।

बैंकों के कुल लोन में भी मजबूत उछाल

अक्टूबर 2025 तक बैंकों की तरफ से दिए गए कुल लोन में लगभग 11 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। नॉन-फूड क्रेडिट में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिलता है कि बाज़ार में कर्ज की मांग लगातार कायम है और आर्थिक गतिविधियां बेहतर स्थिति में हैं।

सर्विस सेक्टर बना सबसे बड़ा मांगकर्ता

सेवा क्षेत्र ने नॉन-रिटेल लोन की वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान दिया। आईटी और सॉफ्टवेयर उद्योग में तेज़ी से विस्तार हुआ है, जबकि शिपिंग और वाणिज्यिक रियल एस्टेट सेक्टर ने भी अप्रत्याशित उछाल दिखाया। गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं की फंडिंग में भी सुधार हुआ है, क्योंकि बैंक अब NBFCs को अधिक कर्ज दे रहे हैं।

छोटे उद्योगों की स्थिति और मजबूत हुई

उद्योग क्षेत्र में माइक्रो और स्मॉल यूनिट्स ने सबसे अधिक वृद्धि दर्ज कराई। इन छोटे उद्योगों ने पिछले साल के मुकाबले बड़ी छलांग लगाई है, जबकि बड़ी कंपनियाँ अब बैंक लोन के बजाय बाज़ार आधारित बॉन्ड या बाहरी फंडिंग पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं।

कृषि और प्राथमिकता क्षेत्र में भी सकारात्मक संकेत

कृषि के लिए जारी होने वाले लोन में स्थिर बढ़ोतरी दिखी है। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में बैंक अधिक रुचि ले रहे हैं, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में तेज़ उछाल देखने को मिला। प्राथमिकता श्रेणी के हाउसिंग लोन और MSME लोन में भी मजबूत बढ़त सामने आई है। हालांकि सामाजिक बुनियादी ढाँचे और निर्यात से जुड़े क्रेडिट में हल्की कमी आई है, लेकिन समग्र रूप से कर्ज की मांग बहुत मजबूत बनी हुई है।