Bihar Silver Rate: 44,000 रुपये सस्ती हुई चांदी, इस कारण हुई भारी गिरावट, बिहार में क्या है भाव जान लीजिए

Bihar Silver Rate: कीमती धातुओं के बाज़ार में आज यानी शुक्रवार को मुनाफ़ा वसूली की तेज़ आंधी चली और चांदी की चमक कुछ देर के लिए फीकी पड़ गई।

Silver Crashes by 44000 Know the Reason and Bihar Rates
44,000 रुपये सस्ती हुई चांदी- फोटो : social Media

Bihar Silver Rate: कीमती धातुओं के बाज़ार में आज यानी शुक्रवार को मुनाफ़ा वसूली की तेज़ आंधी चली और चांदी की चमक कुछ देर के लिए फीकी पड़ गई। मज़बूत अमेरिकी डॉलर ने निवेशकों के मनोबल पर दबाव बनाया, नतीजतन एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में करीब 6 फीसदी की तीखी गिरावट दर्ज की गई। चांदी फिसलकर 3,75,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई, जो 29 जनवरी को बने इसके रिकॉर्ड हाई 4,20,048 रुपये से करीब 44,000 रुपये यानी लगभग 10 फीसदी नीचे है।

हालांकि, इस गिरावट के बावजूद कारोबारी तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं है। चांदी ने जनवरी महीने में अब तक करीब 62फीसदी  की ज़बरदस्त बढ़त दर्ज की है, जो इसके इतिहास का सबसे मज़बूत मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है। यानी अल्पकालिक करेक्शन के बीच दीर्घकालिक ट्रेंड अब भी बुलिश बना हुआ है।

वैश्विक बाज़ार की बात करें तो स्पॉट सिल्वर 0.2फीसदी  गिरकर 115.83 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। गौरतलब है कि एक दिन पहले ही यह 121.64 डॉलर के नए रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी थी। डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती ने धातुओं पर दबाव डाला। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के फ़ैसले के बाद डॉलर को सहारा मिला, हालांकि डॉलर लगातार दूसरे सप्ताह कमजोरी की ओर बढ़ रहा है।

फेड चेयर जेरोम पॉवेल के इस बयान कि महंगाई अभी 2फीसदी के लक्ष्य से ऊपर रह सकती है, ने बाज़ार को सतर्क कर दिया है। इसी बीच अमेरिकी बेरोज़गारी दावों में गिरावट के आंकड़ों ने श्रम बाज़ार की मज़बूती का संकेत दिया, जिससे डॉलर को और समर्थन मिला।

सोने में भी करेक्शन देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड 0.9फीसदी  टूटकर 5,346.42 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि एक दिन पहले यह 5,594.82 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर था। बावजूद इसके, जनवरी में सोना 24% से अधिक चढ़ चुका है 1980 के बाद की सबसे बड़ी मासिक छलांग।

अर्थशात्री डॉ रामानंद पाण्डेय के अनुसार  नीतिगत अनिश्चितता, राजकोषीय दबाव और भू-राजनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बनी रहेगी। नरम या सीमित दायरे में घूमता डॉलर और बढ़ती अस्थिरता, सोने-चांदी जैसे एसेट्स को लंबी अवधि में सहारा देती रहेगी। कारोबारियों के लिए संदेश साफ़ है करेक्शन डराने वाला नहीं, बल्कि रणनीतिक मौके का इशारा भी हो सकता है।