IMF India debt: दुनिया के इन 4 बड़े देशों पर कितना कर्ज, जानें भारत की स्थिति
IMF India debt: अमेरिका, चीन, जापान और भारत पर कितना सरकारी कर्ज है? जानें सरकारें कर्ज क्यों लेती हैं, ब्याज कैसे चुकाती हैं और बढ़ते कर्ज का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है।
IMF India debt: दुनिया के कई देश बढ़ते सरकारी कर्ज और उस पर दिए जाने वाले ब्याज के कारण आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। अमेरिका, चीन और जापान जैसे बड़े देशों पर लाखों करोड़ रुपये का सरकारी कर्ज है। वहीं, फ्रांस, इटली और ब्रिटेन जैसे देशों को भी अपने कर्ज और ब्याज का खर्च संभालना पड़ रहा है। जब सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च होता है, तो सड़क, रेलवे, अस्पताल, शिक्षा और दूसरी जरूरी सेवाओं के लिए पैसा जुटाना चुनौती बन सकता है।
सरकारें कर्ज क्यों लेती हैं?
सरकारों को टैक्स और दूसरे स्रोतों से पैसा मिलता है। इस पैसे से वे देश में सड़क, रेलवे, अस्पताल, स्कूल, सुरक्षा और दूसरी जरूरी सेवाओं पर खर्च करती हैं। लेकिन कई बार सरकार का खर्च उसकी कमाई से ज्यादा हो जाता है। ऐसे में इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती है।
सरकारें आम तौर पर सरकारी बॉन्ड जारी करके पैसा जुटाती हैं। बैंक, बीमा कंपनियां और दूसरे निवेशक इन बॉन्ड को खरीदते हैं। इसके बदले सरकार तय दर से ब्याज देती है और तय समय पूरा होने पर मूल रकम लौटाती है। कई बार पुराने कर्ज को चुकाने के लिए भी सरकार को नया कर्ज लेना पड़ता है।
100 रुपये के कर्ज पर कितना ब्याज देना होगा?
इसे एक आसान उदाहरण से समझिए। मान लीजिए कि सरकार 100 रुपये का बॉन्ड जारी करती है और उस पर सालाना ब्याज दर 2.5 प्रतिशत तय है। अगर कोई निवेशक यह बॉन्ड खरीदता है, तो सरकार को हर साल 2.50 रुपये ब्याज देना होगा। अगर बॉन्ड की अवधि 10 साल है और ब्याज दर पूरे समय 2.5 प्रतिशत रहती है, तो सरकार 10 साल में कुल 25 रुपये ब्याज देगी। इसके अलावा, तय समय पूरा होने पर उसे 100 रुपये की मूल रकम भी लौटानी होगी। यह उदाहरण साधारण ब्याज और हर साल समान भुगतान को मानकर दिया गया है; असल बॉन्ड की शर्तें अलग हो सकती हैं।
दुनिया के बड़े देशों पर कितना सरकारी कर्ज है?
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इन प्रमुख देशों पर सरकारी कर्ज की अनुमानित रकम इस प्रकार है:
देश सरकारी कर्ज
अमेरिका 3,933 लाख करोड़ रुपये
चीन 2,137.5 लाख करोड़ रुपये
जापान 826.5 लाख करोड़ रुपये
ब्रिटेन 418 लाख करोड़ रुपये
फ्रांस 399 लाख करोड़ रुपये
इटली 351.5 लाख करोड़ रुपये
जर्मनी 332.5 लाख करोड़ रुपये
भारत 323 लाख करोड़ रुपये
कनाडा 275.5 लाख करोड़ रुपये
ध्यान दें कि ये कुल कर्ज की रकम हैं। अलग-अलग देशों के आंकड़ों में सरकारी कर्ज की परिभाषा, आंकड़ों का साल और मुद्रा बदलने के लिए इस्तेमाल की गई विनिमय दर का फर्क हो सकता है। इसलिए इन रकमों की तुलना करते समय संबंधित अवधि और स्रोत को देखना जरूरी है।
भारत पर कितना है सरकारी कर्ज?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल सरकारी कर्ज 2026 में सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP का करीब 83.4 प्रतिशत अनुमानित है। इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य सरकारों के कुल कर्ज की तुलना देश में एक साल के दौरान बनने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कुल कीमत से की जाती है। इससे पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था के आकार के मुकाबले सरकारी कर्ज कितना है। हालांकि, किसी देश की आर्थिक स्थिति को समझने के लिए केवल कर्ज की कुल रकम देखना काफी नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि उस देश की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है, सरकार की आमदनी कितनी है और उसे हर साल ब्याज चुकाने में कितना पैसा खर्च करना पड़ता है।
बढ़ते ब्याज का आम लोगों पर क्या असर पड़ता है?
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं या पुराने कर्ज की जगह नया कर्ज महंगी दरों पर लेना पड़ता है, तो सरकार का ब्याज खर्च बढ़ सकता है। इससे सरकार के बजट पर दबाव पड़ता है और विकास योजनाओं या जरूरी सेवाओं के लिए उपलब्ध पैसे पर असर पड़ सकता है।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सरकारी कर्ज बढ़ने से हर बार सरकारी योजनाओं में कटौती होगी। असर इस बात पर निर्भर करता है कि सरकार की कमाई कितनी है, आर्थिक विकास कैसा है और वह अपने खर्च को किस तरह संभालती है। सरकारी कर्ज अपने आप में हमेशा बुरा नहीं होता। अगर उधार का इस्तेमाल सड़क, रेलवे, शिक्षा और दूसरी ऐसी सुविधाओं पर किया जाए जिनसे भविष्य में अर्थव्यवस्था को फायदा हो, तो यह विकास में मदद कर सकता है। समस्या तब बढ़ती है, जब कर्ज और ब्याज का बोझ सरकार की कमाई के मुकाबले बहुत ज्यादा हो जाता है।