आधी रात को नीतीश के सांसद के ठिकाने पर पुलिस ने मारा रेड ,बिना वारंट के छापेमारी पर गरमाई बिहार की सियासत

Bihar Police Raid: बिहार में उस वक्त सियासी और पुलिसिया गलियारे में हड़कंप मच गया, जब भारी पुलिस बल ने जेडीयू सांसद के पैतृक आवास समेत तीन ठिकानों पर देर रात अचानक दबिश दी।

Banka Police raid Nitish MP premises
खाकी बनाम खादी- फोटो : social Media

Bihar Police Raid: बिहार के बांका जिले में उस वक्त सियासी और पुलिसिया गलियारे में हड़कंप मच गया, जब भारी पुलिस बल ने जेडीयू सांसद गिरिधारी यादव के पैतृक आवास समेत तीन ठिकानों पर देर रात अचानक दबिश दी। इसे पुलिसिया भाषा में 'सर्च ऑपरेशन' और सांसद के शब्दों में 'लोकतंत्र की हत्या' कहा जा रहा है।

मामले की जड़ ओढ़नी डैम के पास बीएसएपी की 10वीं वाहिनी के प्रस्तावित मुख्यालय की जमीन से जुड़ा है, जहाँ अवैध रूप से मिट्टी का भारी 'उखनन' (खनन) हुआ था। एफआईआर दर्ज होने के बाद तफ्तीश के दौरान पुलिस की जांच सुई प्रिंस कंस्ट्रक्शन से जुड़े ओंकार यादव और सांसद के सगे भाई लालधारी यादव पर जाकर टिकी। पुलिस की मानें तो यह पूरी कवायद किसी सांसद को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि नामजद 'फरार' मुलजिम लालधारी यादव की धरपकड़ के लिए की गई महज़ एक 'छापेमारी' थी।

दूसरी तरफ, खाकी की इस कार्रवाई पर खादी सख्त ऐतराज जता रही है। सांसद गिरिधारी यादव का सीधा आरोप है कि खाकीधारियों ने बिना किसी 'सर्च वारंट' के घर में घुसकर तलाशी ली। जब सांसद ने मौके पर मौजूद पुलिस अफ़सरान से वारंट की मांग की, तो अफ़सरों ने साफ कहा कि यह सीधे बांका एसपी अमितेश कुमार के फरमान पर हुई कार्रवाई है।

सांसद का कहना है कि उनके 40 साल के बेदाग सियासी सफर में उन पर कभी कोई आपराधिक दफा या केस दर्ज नहीं हुआ, इसके बावजूद घर के मर्द सदस्यों की गैर-मौजूदगी में आधी रात को यह दबिश दी गई। उन्होंने एसपी पर फोन न उठाने और नजरअंदाज करने का संगीन आरोप लगाते हुए भागलपुर आईजी से इस पूरे घटनाक्रम की 'निष्पक्ष तफ्तीश' और कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल इस हाई-प्रोफाइल मामले ने बांका से लेकर पटना तक हड़कंप मचा दिया है।