Bihar Fake Land Papers: ईओयू का बड़ा शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में रिटायर्ड इंजीनियर गिरफ्तार, फर्जी दस्तावेज़ बनाकर जांच भटकाने का आरोप

Bihar Fake Land Papers: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आर्थिक अपराध इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के रिटायर्ड कार्यपालक अभियंता रामचंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है।....

Bihar EOU Cracks Down
रिटायर्ड इंजीनियर गिरफ्तार- फोटो : social Media

Bihar  Fake Land Papers: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग के रिटायर्ड कार्यपालक अभियंता रामचंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। दानापुर के सगुना मोड़ निवासी रामचंद्र गुप्ता पर वर्षों पुराने आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले के साथ-साथ जांच को गुमराह करने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोप हैं। गिरफ्तारी के बाद ईओयू ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक, रामचंद्र गुप्ता के खिलाफ वर्ष 2013 में आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान ईओयू ने उनके ठिकानों पर छापेमारी कर जमीन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए थे। आरोप है कि डीए केस से बचने और जांच को भटकाने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी पूनम गुप्ता के नाम से जमीन के कई फर्जी दस्तावेज तैयार कर ईओयू को सौंप दिए। लेकिन जब दस्तावेजों की गहन जांच हुई तो वे सभी फर्जी पाए गए।

इसके बाद ईओयू ने वर्ष 2016 में एक और एफआईआर दर्ज की। इस मामले में रामचंद्र गुप्ता के अलावा उनकी पत्नी पूनम गुप्ता, एक कातिब और उनके करीबी आदित्य चंद्रा को भी आरोपी बनाया गया। मामले में पूनम गुप्ता को अदालत से जमानत मिल गई, जबकि कातिब और आदित्य चंद्रा को जेल जाना पड़ा।

जैसे-जैसे गिरफ्तारी का शिकंजा कसने लगा, रामचंद्र गुप्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उन्हें वर्ष 2020 तक गिरफ्तारी से राहत मिली। बाद में 2024 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह पटना छोड़कर दिल्ली-नोएडा इलाके में रहने लगे। ईओयू को हाल ही में उनके दानापुर आने की गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

ईओयू अधिकारियों के अनुसार, 2013 के आय से अधिक संपत्ति मामले में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है और अब इस मामले का ट्रायल जल्द शुरू होगा। वहीं, 2016 में दर्ज जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और जांच को गुमराह करने के मामले में भी आगे की कानूनी कार्रवाई तेज की जाएगी। ईओयू का मानना है कि आरोपी ने कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की, लेकिन तकनीकी और दस्तावेजी जांच में पूरा खेल उजागर हो गया। अब दोनों मामलों में अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपों की कानूनी जांच होगी। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और दस्तावेजी जालसाजी के मामलों में ईओयू की सख्त नीति का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है।

ब्यूरो रिपोर्ट