बिहार के 350 से ज्यादा सुपारी किलर जाएंगे जेल, एसटीएफ ने लिस्ट कर ली है तैयार

Bihar STF: बिहार में बढ़ते संगठित अपराध और अपराधियों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूद करने के लिए बिहार एसटीएफ ने शिकंजा कस दिया है।

बिहार के 350 से ज्यादा सुपारी किलर जाएंगे जेल, एसटीएफ ने  लि
वारदातों से पहले खात्मा ही होगा खात्मा- फोटो : Hiresh Kumar

Bihar STF: बिहार की सरमीन पर जुर्म के काले साये को मिटाने के लिए खाकी ने अपनी मुस्तैदी तेज कर दी है। सूबे में बढ़ते संगठित अपराध  और अपराधियों के नापाक मंसूबों को नेस्तनाबूद करने के लिए बिहार एसटीएफ ने शिकंजा कस दिया है। पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में एक प्रेस वार्ता के दौरान एसटीएफ के डीआईजी संजय कुमार सिंह ने इस बाबत सनसनीखेज खुलासे किए। उन्होंने बताया कि किस तरह खाकी के खौफ से अपराधियों की रूह कांप रही है।एसटीएफ ने राज्यभर में 350 से अधिक सुपारी किलर्स की एक खुफिया हिटलिस्ट तैयार की है, जिनकी शिनाख्त कर ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां शुरू कर दी गई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक कुल 1716 कुख्यात अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इन गिरफ्त में आए शातिर मुजरिमों में बड़ी तादाद टॉप-10 और हार्डकोर अपराधियों की है, जिन पर कानून का शिकंजा कस चुका है।

डीआईजी संजय कुमार सिंह ने बताया कि इन दबोचे गए मुजरिमों में से 63 अपराधियों पर जिला या राज्य स्तर पर बड़ा इनाम घोषित था। अपराध के इस खूनी खेल में खाकी की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 8 महीनों में पुलिस और अपराधियों के बीच 19 मुठभेड़ हो चुकी हैं। इन एनकाउंटर्स में 3 अपराधी जहन्नुम पहुंच गए (मारे गए), जबकि 18 कुख्यात गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल की बेड पर आ पहुंचे।इसके अलावा, विभिन्न संगीन वारदातों में संलिप्त 27 अपराधियों को राज्य के बाहर से दबोचकर ट्रांजिट रिमांड पर बिहार लाया गया है। एसटीएफ दूसरे राज्यों में अपनी जड़े जमा चुके इन मुजरिमों के सिंडिकेट को ध्वस्त करने के लिए लगातार ऑपरेशन चला रही है।

पुलिस का साफ कहना है कि इस आक्रामक रणनीति का मकसद सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उनके पूरे आपराधिक नेटवर्क  को जड़ से उखाड़ फेंकना और इलाके में कानून-व्यवस्था की हुकूमत कायम करना है।

एसटीएफ की कार्रवाई का मुख्य फोकस वारदात के बाद मुजरिम को तलाशने के बजाय, उसे घटना को अंजाम देने से पहले ही धर दबोचने पर है। इसके लिए एक खास खुफिया तंत्र (Intelligence Network) एक्टिव किया गया है। जिलों में तैनात चुनिंदा पदाधिकारियों के जरिए सक्रिय अपराधी गिरोहों और उनके कारगुजारियों का एक मुकम्मल डेटाबेस तैयार किया गया है। इसी डेटाबेस और पुख्ता तकनीकी सर्विलांस के आधार पर इन गैंग्स के खिलाफ लगातार दबिश दी जा रही है, जिससे अपराधियों में खौफ का माहौल है।

रिपोर्ट- रंजीत कुमार