Bihar Tender Scam: टेंडर के तिलिस्म पर शिकंजा, रिशुश्री से 30 घंटे की पूछताछ, पर जुबान अब भी बंद, ठेकेदारों के नेटवर्क, लेनदेन और रसूख की कड़ियां जोड़ने में जुटी विशेष निगरानी इकाई
Bihar Tender Scam: रिशुश्री ने 30 घंटे की पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया कि “सरकारी काम बिना लेनदेन के नहीं चलता,” जिससे मामले ने और गंभीर मोड़ ले लिया है।
Bihar Tender Scam: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में विशेष निगरानी इकाई ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी ठेकेदार रिशुश्री को रिमांड पर लेकर लंबी पूछताछ की है। करीब 30 घंटे से अधिक चली इस पूछताछ के बावजूद आरोपी के रुख में कोई खास नरमी नहीं दिखी। जांच एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, रिशुश्री लगातार असहयोगात्मक रवैया अपनाता रहा और कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब देने से बचता रहा।
सूत्रों का कहना है कि रिमांड के दौरान हर दिन औसतन 7 से 8 घंटे तक पूछताछ की गई, जिसमें जांच अधिकारियों की अलग-अलग टीमें बारी-बारी से सवाल पूछती रहीं। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई ताकि साक्ष्य के तौर पर अदालत में प्रस्तुत किया जा सके। पूछताछ के दौरान आरोपी से सरकारी ठेकों की प्रक्रिया, अधिकारियों से कथित सांठगांठ, लेन-देन के तरीकों और टेंडर मैनेजमेंट से जुड़े गहरे सवाल किए गए।
हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि रिशुश्री ने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया कि “सरकारी काम बिना लेनदेन के नहीं चलता,” जिससे मामले ने और गंभीर मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी ने कई सवालों पर अपने वकील के निर्देश का हवाला देते हुए जवाब देने से इनकार कर दिया।
SVU के अधिकारियों ने बताया कि रिशुश्री से जुड़े सहयोगी संतोष, गिरफ्तार अधिकारी तारिणी दास, मुमुक्षु चौधरी और उमेश सिंह को भी जल्द रिमांड पर लिया जा सकता है। वहीं, फरार चल रहे आईएएस अधिकारी संजीव हंस, योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा की भूमिका को लेकर भी जांच तेज कर दी गई है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि रिशुश्री ने बड़े अधिकारियों के साथ अपने संबंधों को “सरकारी कामकाज” का हिस्सा बताया, जबकि जांच एजेंसियां इसे प्रभाव और दबाव की रणनीति के रूप में देख रही हैं। छोटे अधिकारियों की पोस्टिंग और टेंडर हासिल करने में कथित रसूख के इस्तेमाल को लेकर भी उसने चुप्पी साध ली।
SVU सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में ईडी की जांच रिपोर्ट से जुड़े कई पहलुओं को भी खंगाला गया, ताकि पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा सकें। इसी क्रम में कुछ संदिग्ध दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी भी जब्त की गई है।बता दें रिशुश्री को 16 जून से पांच दिन की रिमांड पर लिया गया था, लेकिन चार दिन की पूछताछ के बाद ही उसे बेऊर जेल वापस भेज दिया गया। पूरे मामले ने एक बार फिर सरकारी टेंडर प्रणाली में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं, जहां जांच एजेंसियां अब इस कथित आर्थिक-सियासी नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।
रिपोर्ट- रंजीत कुमार