सारण के घूसखोर डीडीसी के करोड़ों की काली संपत्ति होगी जब्त, बीवी-बेटी के नाम पर है हराम की कमाई, निगरानी के एक्शन से चढ़ावा लेने वालों में हड़कंप

Bihar Crime: सारण जिले से एक सनसनीखेज और संगीन मामला सामने आया है, जहाँ एक बड़े अफसर की हराम की कमाई अब कानून के शिकंजे में फंसती दिख रही है। ...

Bribe Tainted DDC Faces Crore Asset Seizure in Saran Crackdo
घूसखोर डीडीसी की काली दौलत होगी जब्त- फोटो : social Media

Bihar Crime:  सारण जिले से एक सनसनीखेज और संगीन मामला सामने आया है, जहाँ एक बड़े अफसर की हराम की कमाई अब कानून के शिकंजे में फंसती दिख रही है। निगरानी इकाई (Special Vigilance Unit) ने पूर्व उप विकास आयुक्त रविकांत तिवारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में बड़ी कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। अब सिर्फ आरोप नहीं, बल्कि उनकी और उनके खानदान के नाम पर खड़ी की गई काली दौलत की जब्ती की तैयारी मुकम्मल हो चुकी है।

यह पूरा केस साल 2015 में दर्ज हुआ था, जब जांच एजेंसियों को भनक लगी कि साहब  ने अपने ओहदे का नाजायज फायदा उठाकर अकूत संपत्ति जमा कर ली है। तहकीकात में यह खुलासा हुआ कि रविकांत तिवारी ने करीब 56 लाख 25 हजार 147 रुपये की चल-अचल संपत्ति अपनी आमदनी से कहीं ज्यादा अर्जित की। यह रकम सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की उस गहरी साज़िश का हिस्सा है, जिसे बड़ी चालाकी से अंजाम दिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि इस काले खेल में परिवार को भी मोहरा बनाया गया। अफसर ने अपनी बीवी मोना तिवारी और बेटी निहारिका भारती के नाम पर जमीन-जायदाद खड़ी की, ताकि कानून की नजर से बचा जा सके। मगर अब यह दांव उल्टा पड़ता दिख रहा है। निगरानी इकाई ने इस पूरी मिल्कियत को ग़ैर-कानूनी कमाई मानते हुए जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मामले को लेकर विशेष निगरानी न्यायाधीश की अदालत में मुकदमा दायर कर दिया गया है। सोमवार को अदालत ने रविकांत तिवारी, उनकी पत्नी और पुत्री तीनों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का हुक्म दिया है। यानी अब इनको अदालत में जवाब देना होगा कि आखिर यह दौलत किस जरिये से हासिल की गई। विशेष लोक अभियोजक राजेश कुमार ने अदालत में यह मुकदमा पेश किया, जिसमें साफ तौर पर कहा गया है कि यह संपत्ति गैर कानूनू तरीकों से जुटाई गई है। अगर अदालत इस दलील से इत्तेफाक रखती है, तो जल्द ही यह पूरी संपत्ति सरकार के कब्जे में जा सकती है।

यह मामला सिर्फ एक अफसर की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की भी पोल खोलता है, जहाँ कुर्सी का रुतबा कमाई का जरिया बन जाता है। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैंक्या कानून का डंडा इस काली कमाई को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर पाएगा या फिर कोई नया दांव खेला जाएगा?