मानपुर अंचल कार्यालय में दबंगई का आरोप, भू-माफिया के दबाव से अधिकारी-कर्मचारी परेशान.

गया के मानपुर अंचल कार्यालय में गोरेलाल उर्फ राजनंदन वर्मा पर सरकारी काम में हस्तक्षेप और अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोप। पुराने FIR मामलों का भी जिक्र।

मानपुर अंचल कार्यालय में दबंगई का आरोप, भू-माफिया के दबाव से

मानपुर : जमीन विवादों और विभिन्न घटनाओं को लेकर गोरेलाल उर्फ राजनंदन वर्मा का नाम लगातार विवादों में सामने आ रहा है। उनके संबंध में उपलब्ध शिकायतों और दस्तावेजों में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी, सरकारी कार्य में बाधा, अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख तथा अन्य गंभीर आरोपों का जिक्र है। एक के बाद एक सामने आए मामलों ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या ऐसे मामलों में प्रशासनिक कार्रवाई कानून और नियम के अनुसार पूरी मजबूती से हो रही है।

उपलब्ध दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, उनके विरुद्ध कुल चार मामलों का उल्लेख सामने आता है। इनमें दो मामले SC/ST Act से संबंधित हैं। एक मामले में गांव की एक लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ एवं मारपीट के आरोप हैं। वहीं, एक अन्य मामले में पंचायत सचिव के साथ कथित मारपीट,सरकारी कार्य में बाधा और सरकारी कर्मी के साथ दुर्व्यवहार के आरोप सामने आए हैं। तथा कुछ दस्तावेजों में आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया है, जिससे मामला और अधिक गंभीर हो जाता है।






वर्ष 2019 से जुड़े मामलों में मारपीट, गाली-गलौज, धमकी और जातिगत दुर्व्यवहार जैसे आरोप लगाए गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों में SC/ST Act के प्रावधानों का भी उल्लेख है। वहीं, पंचायत निर्वाचन के दौरान प्रखंड कार्यालय से जुड़े मामले में सरकारी कार्य में कथित हस्तक्षेप, मारपीट तथा सरकारी कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोपों का उल्लेख मिलता है।

एक अन्य मामले में लड़की के साथ कथित छेड़छाड़ और मारपीट को लेकर विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की बात सामने आई है। इसके अलावा पंचायत सचिव के साथ कथित मारपीट का मामला भी गंभीर है, क्योंकि इसमें सीधे एक सरकारी कर्मी के साथ दुर्व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा का आरोप जुड़ा है।

इन मामलों की प्रकृति को देखते हुए मामला सिर्फ व्यक्तिगत विवादों तक सीमित नहीं रह जाता। यदि सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार, धमकी, आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप या सरकारी काम में हस्तक्षेप के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्षता और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर विषय है। सरकारी कर्मचारी यदि बाहरी दबाव के कारण स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में असहज महसूस करें, तो इसका सीधा असर आम लोगों को मिलने वाले न्याय और प्रशासनिक सेवाओं पर पड़ सकता है।


शांति समिति की सदस्यता पर भी सवाल


इन चार मामलों में गंभीर आरोपों के सामने आने के बावजूद गोरेलाल उर्फ राजनंदन वर्मा का शांति समिति का सदस्य बने रहना भी अब सवालों के घेरे में है। शांति समिति का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सौहार्द और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करना है। ऐसे में जिन व्यक्तियों के विरुद्ध मारपीट, धमकी, सरकारी कार्य में बाधा, जातिगत दुर्व्यवहार, आर्म्स एक्ट से जुड़े आरोप अथवा अन्य गंभीर मामलों से संबंधित शिकायतें दर्ज होने की बात सामने आई हो, उनकी शांति समिति की सदस्यता पर प्रशासन को नियमों के अनुरूप पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि समिति की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर कोई सवाल न उठे।


मानपुर क्षेत्र में जमीन विवाद और अन्य स्थानीय विवाद पहले से ही संवेदनशील विषय रहे हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि संबंधित सभी मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध समीक्षा की जाए तथा यदि किसी मामले में आरोप प्रमाणित होते हैं तो कानून के अनुसार प्रभावी कार्रवाई की जाए। साथ ही सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी प्रकार के दबाव या धमकी से मुक्त वातावरण में काम करने की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।


हालांकि, किसी मामले में आरोप लगना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। सभी मामलों का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा। लेकिन चार अलग-अलग मामलों में गंभीर आरोपों का सामने आना और इसके बावजूद शांति समिति की सदस्यता बने रहना प्रशासन के लिए समीक्षा का विषय जरूर है।