Bihar Crime: थानेदार की जमानत खारिज, अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के लिए न्यायिक अभिलेख से छेड़छाड़, जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा खाकी अफसर

Bihar Crime: अभियुक्त को फायदा पहुंचाने की नीयत से न्यायिक अभिलेख में छेड़छाड़ का जो इल्ज़ाम लगा है, उसने पुलिस महकमे की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है।...

Motihari SHO s bail rejected
थानेदार की जमानत खारिज- फोटो : reporter

Bihar Crime: बिहार की अदालतों में इस वक्त कानून बनाम खाकी की एक सनसनीखेज फाइल खुल चुकी है। अभियुक्त को फायदा पहुंचाने की नीयत से न्यायिक अभिलेख में छेड़छाड़ का जो इल्ज़ाम लगा है, उसने पुलिस महकमे की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिपरा थाना के तत्कालीन थानेदार शशिभूषण प्रसाद को इसी संगीन जुर्म में अदालत ने जेल भेज दिया है। पिछले 20 दिनों से वह सलाखों के पीछे बंद हैं और अब न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका भी सिरे से खारिज कर दी है।

पंचम जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश कुमार तिवारी ने इस मामले को “अत्यंत गंभीर” करार दिया। अदालत का साफ कहना है कि अगर कानून के रखवाले ही कानून की किताब में हेराफेरी करने लगें, तो इंसाफ की बुनियाद हिल जाती है। यही वजह रही कि अदालत ने थानेदार को कोई राहत देने से इंकार कर दिया।

मामले की जड़ पिपरा थाना कांड संख्या 250/14 से जुड़ी है। परिवादी नवीन कुमार सिंह, जो खुद अधिवक्ता हैं, ने अदालत में परिवाद पत्र दाखिल कर आरोप लगाया कि तत्कालीन थानाध्यक्ष शशिभूषण प्रसाद, तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर चकिया सुधाकर नाथ, केस के अनुसंधानकर्ता हरिशंकर प्रसाद और जीआर क्लर्क ने आपराधिक साजिश के तहत केस डायरी और चार्जशीट में व्हाइटनर का इस्तेमाल कर भादंवि की धारा 307 (हत्या के प्रयास) को मिटा दिया। मकसद साफ था अभियुक्त को कानूनी शिकंजे से बाहर निकालना।

अदालत ने इस गंभीर आरोप पर संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ सम्मन जारी किया। जब हाजिरी नहीं हुई तो वारंट और बाद में कुर्की-जब्ती तक का आदेश निकला। एसपी के दबाव में तत्कालीन थानेदार ने अग्रिम जमानत के लिए अदालतों के चक्कर लगाए, लेकिन निचली अदालत से लेकर उच्च न्यायालय तक हर जगह से उन्हें नकारा गया। हाईकोर्ट ने 15 दिनों के भीतर निचली अदालत में हाजिर होने का आदेश दिया था, मगर तय वक्त गुजरने के बाद थानेदार ने कथित समझौते का सहारा लेकर जमानत की कोशिश की।

परिवादी ने समझौता मानने से इंकार कर दिया। नतीजा यह हुआ कि अदालत ने थानेदार को सीधे कारा भेज दिया। बाद में जिला जज के समक्ष जमानत याचिका संख्या 35/26 दाखिल की गई, लेकिन सुनवाई के बाद अदालत ने एक बार फिर साफ संदेश दे दिया कानून की फाइल से छेड़छाड़ करने वालों के लिए जेल ही आखिरी ठिकाना है।

रिपोर्ट- हिमांशु कुमार