Bihar Police: थानाध्यक्ष समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड, ग्रामीण की मौत मामले में कसा शिकंजा, दो और पर निलंबन की लटकी तलवार , पुलिस विभाग मे हड़कंप
Bihar Police:गांव में हुई खूनी भिड़ंत देखते ही देखते जंग का मैदान बन गया। अब इस पूरे कांड में लापरवाही और गलत फैसलों के चलते कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिर गई है।
Bihar Police:गांव में हुई खूनी भिड़ंत देखते ही देखते जंग का मैदान बन गया। अब इस पूरे कांड में लापरवाही और गलत फैसलों के चलते कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिर गई है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट थाना क्षेत्र के चोरनिया गांव में हुई खूनी भिड़ंत ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया है। छापेमारी के दौरान जो ऑपरेशन होना था, वह देखते ही देखते जंग का मैदान बन गया। अब इस पूरे कांड में लापरवाही और गलत फैसलों के चलते कई पुलिसकर्मियों पर गाज गिर गई है।इस मामले में मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने राजा सिंह (तत्कालीन थानाध्यक्ष) समेत छह लोगों को निलंबित कर दिया गया है। इनमें पु०अ०नि० मनीष कुमार, पीटीसी-1097 रंजन कुमार, महिला सिपाही चांदनी कुमारी, चालक हया ओम प्रकाश और स्थानीय चौकीदार प्रहलाद कुमार शामिल हैं।

घटना 17-18 मार्च 2026 की रात की बताई जा रही है, जब पुलिस टीम एक वांछित अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए चोरनिया गांव में छापेमारी करने पहुंची थी। लेकिन जैसे ही पुलिस ने दबिश दी, आरोपी ने हल्ला बोल कर गांववालों को इकट्ठा कर लिया। इसके बाद भीड़ बेकाबू हो गई और पुलिस टीम पर पत्थरों की बरसात, लाठी-डंडों से हमला और यहां तक कि फायरिंग भी शुरू कर दी गई।
हालात इतने बिगड़ गए कि पुलिस टीम भीड़ के जाल में फंस गई। जान बचाने के लिए तत्कालीन थानाध्यक्ष राजा सिंह को आत्मरक्षा में हवाई फायरिंग करनी पड़ी और किसी तरह अपनी टीम के साथ वहां से निकलना पड़ा। लेकिन इस हिंसक टकराव में एक ग्रामीण जगतवीर राय की मौत हो गई, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा संगीन बना दिया।
जांच में सामने आया कि पुलिस ने बिना पूरी खुफिया जानकारी और अपर्याप्त बल के साथ छापेमारी की। पहले भी इसी गांव में पुलिस को भारी विरोध झेलना पड़ा था, लेकिन इसके बावजूद टीम ने बिना प्लानिंग के ऑपरेशन चला दिया। स्थानीय चौकीदार ने भी पहले की घटनाओं की जानकारी नहीं दी, जिससे स्थिति और बिगड़ गई।
अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी दल ने न तो संयम बरता और न ही हालात को भांपकर कोई रणनीतिक फैसला लिया। इसी लापरवाही को आधार बनाकर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (पूर्वी-01) की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई।

फिलहाल दो अन्य कर्मियों के खिलाफ भी अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश जिला प्रशासन से की गई है। इस पूरे कांड ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर बिना तैयारी के ऐसे खतरनाक ऑपरेशन क्यों अंजाम दिए जाते हैं, जहां कानून के रखवाले खुद ही जान जोखिम में डाल देते हैं।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा