Bihar Police Hooliganism: चार रुपये के लिए पुलिसवाले ने दुकानदार पर तानी पिस्टल, सिंघम बनना पड़ा भारी,CCTV सबूत बना गेमचेंजर,बड़े साहब ने नाप दिया
Bihar Police Hooliganism: बिहार की सड़कों पर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब महज़ चार रुपये के मामूली हिसाब-किताब ने एक सिपाही को वर्दी वाला गुंडा बना दिया। ..
Bihar Police Hooliganism: बिहार की सड़कों पर उस वक्त सनसनी फैल गई, जब महज़ चार रुपये के मामूली हिसाब-किताब ने एक सिपाही को खौफ का खिलाड़ी बना दिया। मामला मुजफ्फरपुर के मोतीपुर हाईवे पेट्रोलिंग से जुड़ा है, जहां तैनात सिपाही दीपू कुमार पाल ने वर्दी की हदें लांघते हुए एक पान दुकानदार पर पिस्टल तान दी। लेकिन इस दबंगई का पूरा खेल दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया और यहीं से कहानी ने पलटी मारी।
बताया जाता है कि ड्यूटी खत्म करने के बाद सिपाही साहब सिविल ड्रेस में सिंघम स्टाइल में अपने दोस्त से मिलने सिवाईपट्टी थाना क्षेत्र के नेकनाम चौक पहुंचे। वहां लस्सी की दुकान पर महज 4 रूपए को लेकर कहासुनी हो गई। मामूली बात ने अचानक क्राइम सीन का रूप ले लिया सिपाही ने गुस्से में आकर दुकानदार पर पिस्टल तान दी और उसे धमकाने लगा। शायद उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उनकी ये हरकत कैमरे की नजर से बच नहीं पाएगी।
सीसीटीवी फुटेज जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, मामला सीधे पुलिस महकमे के ऊपरी दरबार तक पहुंच गया। मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने तुरंत एक्शन लेते हुए सिपाही को निलंबित कर दिया और सिवाईपट्टी थाने में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दे दिया। जांच में मामला सही पाया गया यानी दबंगई का सबूत साफ-साफ सामने था।
अब हालात ये हैं कि जो सिपाही कल तक दूसरों को कानून का डर दिखा रहा था, वही आज खुद गिरफ्तारी के खौफ में इधर-उधर भागता फिर रहा है। शिकार करने निकला शिकारी, खुद जाल में फंस गया ये कहावत इस केस पर बिल्कुल फिट बैठती है।

वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने साफ किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है चाहे वह वर्दी में हो या बिना वर्दी के। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर छोटी-छोटी बातों पर कानून के रखवाले ही अगर गन कल्चर दिखाने लगें, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? मुजफ्फरपुर की ये घटना अब सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि वर्दी के दाग की एक बड़ी मिसाल बन चुकी है, जहां चार रुपये की लड़ाई ने पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट- मणिभूषण शर्मा