बिहार में जहरीली शराब का कहर फिर बरपा, मोतिहारी में मौतों का सिलसिला जारी, चोरी छुपे इलाज कराने वालों की बढ़ी संख्या, हुजूर पर उठ रहे सवाल

Motihari hooch tragedy: 2023 के काले जख्म अभी भर भी नहीं पाए कि मोतिहारी के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में कथित जहरीली शराब ने एक और जान ले ली। ..

Toxic Liquor Strikes Again in Motihari
बिहार में शराब का कहर फिर बरपा- फोटो : reporter

Motihari hooch tragedy: बिहार में पूरा शराबबंदी होने के बावजूद जहरीली शराब का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है। कभी सीवान, तो कभी समस्तीपुर, और अब मोतिहारी जहां मौतें और दर्द एक बार फिर हकीकत बनकर उभर आए हैं। 2023 के काले जख्म अभी भर भी नहीं पाए कि मोतिहारी के रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव में कथित जहरीली शराब ने एक और जान ले ली। मृतक की संख्या अब दो हो चुकी है, और करीब आधा दर्जन से अधिक लोग इलाजरत हैं।

सूत्रों के मुताबिक, दो-दस लोग इस जहरीली शराब के जाल में फंसे। ग्रामीण बताते हैं कि कई लोग चोरी-छुपे इलाज करवा रहे हैं, क्योंकि डर है कि मामला खुल जाएगा। मृतक प्रमोद यादव तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया के रहने वाले थे।

याद दिला दें कि ढाई साल पहले मोतिहारी के पांच थाना क्षेत्रों तुरकौलिया, हरसिद्धि, पहाड़पुर, सुगौली और रघुनाथपुर में हुए जहरीली शराब कांड में 42 लोगों की मौत हुई थी। उस मास्टरमाइंड गब्बर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने हिंदी बाजार से कैमिकल मंगवाकर अलग-अलग जगहों पर जहरीली शराब सप्लाई की थी।

इस बार भी ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि इलाके में अवैध शराब का धंधा लंबे समय से चल रहा है, लेकिन प्रशासन सख्ती से कदम नहीं उठा रहा। लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और स्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं।

इलाके के इलाजरत लोगों में लोहा ठाकुर, पिता नंदकिशोर ठाकुर और लड्डू साह उर्फ जितेंद्र शाह, पिता रमेश शाह शामिल हैं। मृतक की पहचान चंदू, पिता सुरेश प्रसाद के रूप में हुई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह सिलसिला और खतरनाक रूप ले सकता है। जहरीली शराब का यह कारोबार न केवल जान ले रहा है, बल्कि गांव की शांति और सुरक्षा को भी दांव पर लगा रहा है।

मोतिहारी के ग्रामीणों का दर्द और आक्रोश साफ है हमेशा की तरह सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, सख्त और स्थायी कार्रवाई होनी चाहिए, नहीं तो मौत का खेल जारी रहेगा। वैसे सरकार खुद चुप हैं बोलें भी तो क्या....
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार