Bihar News: कुलपति की कुर्सी पर संकट?BAU में बड़ा बवाल, VC पर अनियमितताओं का आरोप, राजभवन तक पहुंचा मामला

Bihar News: सबौर कृषि विश्वविद्यालय में अनियमितता के आरोप लगे हैं।अनियमितता के आरोप को लेकर राजभवन से कार्रवाई की मांगकी गई है..

VC under fire at BAU irregularities
राजभवन से हाईलेवल जांच की मांग- फोटो : reporter

Bihar News: बिहार के चर्चित शिक्षण संस्थान बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह पर अकादमिक, प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है।

मामले को लेकर डॉ. संजीव कुमार सिंह, जो बिहार विधान परिषद सदस्य और याचिका समिति के अध्यक्ष हैं, ने राज्यपाल सह कुलाधिपति को विस्तृत पत्र भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय अधिनियम और परिनियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।

विधान पार्षद के मुताबिक, बिहार लोक सेवा आयोग को नियुक्तियों का अधिकार सौंपे जाने के बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर मनमाने तरीके से बहाली, नामांकन और वित्तीय फैसले लिए जा रहे हैं। इससे पारदर्शिता और नियमों की धज्जियां उड़ने की बात कही जा रही है।

यह पहला मौका नहीं है जब कुलपति पर सवाल उठे हैं। मई 2025 में भी इसी तरह के आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बावजूद न तो ठोस जांच शुरू हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई। इस पर नाराजगी जताते हुए कहा गया है कि कार्रवाई में देरी से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।डॉ. संजीव कुमार सिंह ने अपने पत्र में साफ कहा है कि लगातार अनियमितताओं से विश्वविद्यालय की साख पर गहरा असर पड़ रहा है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाया गया तो शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा सकती है।

राज्यपाल से की गई प्रमुख मांगों में कुलपति पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति का गठन, जांच पूरी होने तक वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक, सदन में दिए गए आश्वासन के अनुरूप विधिसम्मत कार्रवाई शामिल हैं।पूरा मामला अब राजभवन तक पहुंच चुका है, जिससे बिहार के शिक्षा और कृषि अनुसंधान क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पहले भी विश्वविद्यालय की कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है।आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा परीक्षा बन सकता है।

रिपोर्ट- चंद्रशेखर भगत