बिहार के इस गांव में लोग दिन में ताला लगा क्यों हो जा रहे घरो में कैद? जानने निकली पुलिस
Motihari News: बिहार के मोतिहारी जिले के पकड़ी दयाल थाना क्षेत्र के एक गांव में इन दिनों एक अजीब माहौल देखने को मिल रहा है. इस गांव में दिन में भी लोग अपने घरों पर ताला लगाकर कैद रहने को मजबूर हैं.

N4N डेस्क: बिहार में एक ऐसा गांव है, जहां गांववाले दिन के उजाले में भी ताला लगाकर घर में रहने को मजबूर है. ऐसा गाव वाले विगत एक पखवाड़े से ज्यादा दिनों से कर रहे हैं.सवाल उठता है आखिर गांववालों का ऐसा क्या डर है, जिसके चलते वह दिन में भी घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं. दरअसल मोतिहारी जिले के बड़का गांव में लोग चोरी की घटनाओं से बहुत ही ज्यादा परेशान हो गए हैं, इसलिए वह इस तरह से जीवन जी रहे हैं. बड़का गांव में पिछले कई दिनों से लगातार हो रही चोरी के कारण गांववाले दिन में उजाले में भी घर में ताला लगाकर रहने को मजबूर हैं.
दरअसल बीते 10 दिनों में लगातार 10 घरों में चोरी की वारदातों ने गांववालों की रातों की नींद उड़ा दी है. चोरों के आतंक से लोग इतने डरे हुए हैं कि अब वे दिन में भी अपने घरों में ताला लगाकर रहते हैं. गांव के लोग मानते हैं कि जब तक पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं करती, तब तक उनका डर बना रहेगा.चोरों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि वे साधु-संतों के घरों तक को निशाना बना चुके हैं. आम लोगों के अलावा, गांव के मंदिरों और आश्रमों में भी चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं. इस कारण गांव के श्रद्धालु और साधु-संत भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. गांववालों ने चोरों से निपटने के लिए अपने घरों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, गांव के युवाओं की टोली रातभर पहरा देकर गश्त कर रही है.
लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के बावजूद पुलिस अभी तक किसी भी चोर को पकड़ने में नाकाम रही है. गांववालों ने पकड़ी दयाल थाने में कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.गांव के लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही पुलिस गश्त और सुरक्षा नहीं बढ़ाई गई, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे. उनका मानना है कि चोरी की बढ़ती घटनाओं से गांव का माहौल बिगड़ता जा रहा है, और अपराधियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए. बड़कागांव में बढ़ती चोरी की घटनाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. जब तक पुलिस ठोस कार्रवाई नहीं करती, लोग इसी तरह अपने घरों में ताले लगाकर डर के साए में जीने को मजबूर हैं.