Sima Anand : 63 की उम्र, बेबाक अंदाज और 'काम' की नई परिभाषा, जानिए कौन हैं चर्चा में आईं सीमा आनंद?
Sima Anand : माइथोलॉजिस्ट, लेखिका और स्टोरीटेलर सीमा आनंद इन दिनों चर्चा में हैं. जानिए कौन है सीमा आनंद......पढ़िए आगे
N4N DESK : लंदन स्थित प्रसिद्ध माइथोलॉजिस्ट, लेखिका और स्टोरीटेलर सीमा आनंद इन दिनों सोशल मीडिया पर अपनी कामुकता की नई परिभाषा को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं। 63 वर्षीय सीमा आनंद केवल एक सेक्स एजुकेटर नहीं हैं, बल्कि वे प्राचीन भारतीय ग्रंथों, विशेषकर कामसूत्र और तांत्रिक दर्शन की एक ऐसी प्रखर व्याख्याकार हैं, जो इस विषय को अश्लीलता के दायरे से बाहर निकालकर 'चेतना' और 'ऊर्जा' के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

सीमा आनंद की विशेषता यह है कि वे कामुकता को महज़ शारीरिक क्रिया नहीं मानतीं। उनकी चर्चित पुस्तक "मोहक कलाएँ" (The Arts of Seduction) में उन्होंने स्पष्ट किया है कि कामवासना वास्तव में मानवीय संबंधों, आत्म-प्रेम और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का विस्तार है। वे भगवद्गीता और प्राचीन कहानियों के माध्यम से यह समझाती हैं कि कैसे आनंद (Pleasure) एक शक्ति है, जिसे हमारे पूर्वजों ने हमेशा से स्वीकार किया था, लेकिन आधुनिक समाज ने इसे वर्जना (Taboo) बना दिया है।

हाल ही में शुभंकर मिश्रा के पॉडकास्ट में सीमा आनंद के विचारों ने डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी। उन्होंने कामुकता के विभिन्न रूपों और इच्छाओं पर जिस बेबाकी से चर्चा की, उसने समाज के एक बड़े वर्ग को सोचने पर मजबूर कर दिया। हालाँकि, इसी बातचीत के दौरान उनके द्वारा साझा किए गए कुछ अनुभवों और विचारों के कारण उन्हें तथाकथित "सभ्य" वर्ग की तीखी आलोचना, गालियों और चरित्र-हनन का सामना भी करना पड़ा।

इस विवाद ने भारतीय समाज के दोहरे मानदंडों को उजागर किया है। एक तरफ सीमा आनंद के विचारों को पश्चिम में एक अकादमिक और सांस्कृतिक शोध के रूप में सम्मान मिलता है, जहाँ वे अपनी गरिमा और बुद्धिमत्ता के साथ जीवन जी रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, भारत में उन्हीं प्राचीन विचारों पर बात करने पर उन्हें नैतिकता के कठघरे में खड़ा किया जा रहा है। ट्रोलिंग के बावजूद, सीमा आनंद का आत्मविश्वास अडिग है और वे इन आलोचनाओं से प्रभावित हुए बिना अपना कार्य जारी रखे हुए हैं।

सीमा आनंद की यह नई परिभाषा आज की पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है, जो उन्हें बिना किसी शर्म या अपराधबोध के अपनी भावनाओं को समझने की प्रेरणा देती है। वे सिखाती हैं कि उम्र केवल एक संख्या है और सौंदर्य, गरिमा व अपनी जड़ों से जुड़ाव ही असली आकर्षण है। आज वे उन लाखों महिलाओं के लिए एक आवाज़ बन गई हैं जो अपनी इच्छाओं को समाज के डर से दबाकर रखती आई हैं।