JNU में ' मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' वाले नारों पर महासंग्राम: छात्रसंघ अध्यक्ष ने किया विचारधारा का बचाव, प्रशासन ने कहा— 'यूनिवर्सिटी प्रयोगशाला नहीं, छात्र होंगे सस्पेंड'

मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' जैसे विवादित नारों का वीडियो वायरल होने के बाद जेएनयू प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। जहाँ छात्रसंघ इसे 'वैचारिक विरोध' बता रहा है, वहीं बीजेपी ने इसे राष्ट्रविरोधी कृत्य करार दिया है।

JNU में ' मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' वाले नारों पर महासंग्राम:

New Delhi - : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर नारों की गूँज और वैचारिक टकराव के केंद्र में है। 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी' जैसे विवादित नारों का वीडियो वायरल होने के बाद जेएनयू प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। जहाँ छात्रसंघ इसे 'लोकतांत्रिक गुस्सा' और 'वैचारिक विरोध' बता रहा है, वहीं भाजपा ने इसे राष्ट्रविरोधी एजेंडा करार दिया है। 

विवादित वीडियो और सियासी घमासान

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में छात्र 'मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर' जैसे आपत्तिजनक नारे लगाते और गाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस वीडियो के सामने आते ही राजनीति गरमा गई है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि यह प्रदर्शन जेल में बंद उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में किया गया था। उन्होंने इसे राष्ट्रविरोधी विचारधारा का प्रसार बताया। वहीं, कांग्रेस ने इसे छात्रों के गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका बताते हुए संतुलित रुख अपनाया है। 

छात्रसंघ अध्यक्ष की सफाई: "यह व्यक्तिगत हमला नहीं"

इन आरोपों को खारिज करते हुए जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि ये नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया गया। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पर की गई टिप्पणियों पर उन्होंने कहा, "वे 2002 की घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। हमें दृढ़ विश्वास है कि जिस फासीवादी विचारधारा का वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उसका इस देश में अंत होना होगा।" 

प्रशासन का 'एक्शन': FIR दर्ज और सस्पेंशन की तैयारी

नारेबाजी के मामले को गंभीरता से लेते हुए जेएनयू प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि कैंपस को नफरत फैलाने वाली 'प्रयोगशाला' नहीं बनने दिया जाएगा। प्रशासन ने बताया कि मामले में पहले ही FIR दर्ज की जा चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा, गैर-कानूनी आचरण या राष्ट्रीय एकता को कमजोर करने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीडियो के आधार पर छात्रों को चिन्हित किया जा रहा है और दोषी पाए जाने वाले छात्रों को तुरंत सस्पेंड किया जाएगा। 

पुराने विवादों की यादें हुईं ताजा

जेएनयू में यह पहला मौका नहीं है जब नारेबाजी ने देश की राजनीति में भूचाल लाया हो। इससे पहले 2016 में अफजल गुरु की फांसी के विरोध में हुए एक कार्यक्रम के दौरान कथित 'राष्ट्र-विरोधी' नारों को लेकर बड़ा कानूनी विवाद हुआ था। उस समय के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालिया घटना ने एक बार फिर उसी पुराने वैचारिक और कानूनी संघर्ष को जिंदा कर दिया है।