Parliament Budget Session: अब सांसदों की कटेगी सैलरी! बजट सत्र से बदलेगा सांसदों की हाजिरी का नियम, खेला करने वाले MP को पड़ेगा भारी
Parliament Budget Session: अब सदन के बाहर हाजिरी के लिए रखे जाने वाले रजिस्टर को समाप्त किया जा रहा है। सांसद बाहर रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लौट जाते थे या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे उनको अब ऐसा करना भारी पड़ेगा।
Parliament Budget Session: फरवरी में संसद का बजट सत्र शुरु हुआ। बजट सत्र से कई नियमों में बदलाव किए जाएंगे। सांसदों की सैलरी में भी कटौती की जा सकती है। जो एमपी संसद के कार्यवाही के दौरान खेला करते थे अब उनको भारी पड़ेगी। कार्यवाही के दौरान कई एमपी संसद तो आते थे लेकिन बाहर रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लौट जाते थे अब यदि कोई एमपी ऐसा करते हैं तो उन्हें भारी पड़ेगा। बजट सत्र कुछ दिनों में शुरु होने वाला है। इसी सत्र से यह नियम लागू हो जाएगा।
सांसदों की हाजिरी को लेकर नया नियम
दरअसल, संसद के आगामी बजट सत्र से लोकसभा सचिवालय सांसदों की हाजिरी को लेकर एक नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब सांसदों की उपस्थिति सदन के भीतर अपनी सीट पर बैठकर ही डिजिटल तरीके से दर्ज होगी। यदि कोई सांसद देरी से सदन में पहुंचता है और उससे पहले हंगामे या किसी अन्य कारण से कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित हो जाती है, तो उस दिन उसकी हाजिरी नहीं लगेगी और उसे एक दिन के वेतन-भत्ते से वंचित होना पड़ेगा।
रजिस्टर वाला सिस्टम खत्म!
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि अब सदन के बाहर हाजिरी के लिए रखे जाने वाले रजिस्टर को समाप्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी तक कई सांसद बाहर रजिस्टर में हस्ताक्षर कर लौट जाते थे या सदन स्थगित होने के बाद पहुंचते थे। नई व्यवस्था में सांसदों को सदन के भीतर जाकर ही उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
संसद में बढ़ेगा एआई का इस्तेमाल
ओम बिरला ने बताया कि संसद की कार्यवाही अब काफी हद तक डिजिटल हो चुकी है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल परीक्षण के तौर पर शुरू किया गया है। फिलहाल वक्ताओं के भाषणों के अनुवाद में एआई का प्रयोग किया जा रहा है, जिसकी सटीकता करीब 80 प्रतिशत है। आईटी कंपनियों की मदद से इसे पूरी तरह सटीक बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह है कि मानसून सत्र से अनुवाद की प्रक्रिया पूरी तरह एआई आधारित हो जाए। इससे बड़ा फायदा यह होगा कि अभी कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होने में चार घंटे तक लगते हैं, जबकि एआई के जरिए यह काम महज आधे घंटे में संभव हो सकेगा। भविष्य में शोध और अनुसंधान कार्यों में भी एआई का उपयोग किया जाएगा।
विपक्ष से सदन चलाने की अपील
जेल जाने पर मंत्रियों को पद से हटाने के प्रावधान से जुड़े विधेयक पर संसदीय समिति की बैठक में विपक्ष के शामिल न होने को लेकर पूछे गए सवाल पर ओम बिरला ने कहा कि यदि विपक्ष अपने विचार रखना चाहता है तो उन्हें शामिल करने का प्रयास किया जाएगा। बजट सत्र में विपक्ष के रुख पर उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि सदन सुचारू रूप से चले और विपक्ष चर्चा के जरिए अपनी बात रखे। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष को पूरा अवसर मिलेगा।
विधानसभाओं के लिए न्यूनतम 30 दिन का लक्ष्य
लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ में चल रहे पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में इस बात पर चिंता जताई गई है कि कई विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में यह संकल्प लिया जाएगा कि सभी विधानसभाएं न्यूनतम 30 दिन अवश्य चलें। कुछ विधानसभाओं का रिकॉर्ड बेहतर भी बताया गया है।
पेपरलेस सदन और स्पीकर के अधिकार
ओम बिरला ने कहा कि संसद के अलावा देश की अधिकांश विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और कई विधानसभाओं की कार्यवाही यूट्यूब पर लाइव प्रसारित की जा रही है। इसी साल सभी विधानसभाओं के पूर्ण डिजिटलीकरण का लक्ष्य रखा गया है। स्पीकर के अधिकारों को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर कई बैठकों में चर्चा हुई है और यह माना गया है कि स्पीकर के अधिकार असीमित नहीं होने चाहिए।