जानिए क्यों की जाती है गुरुवार के दिन भगवान बृहस्पति की पूजा, श्रीहरि विष्णु और देवगुरु की पूजा करने से खुल जाता है भाग्य, ऐसे करें पूजा

Religion: बृहस्पतिवार, जगत् के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु तथा समस्त देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति को अर्पित है।

Worship of Jupiter and Vishnu
श्रीहरि विष्णु एवं देवगुरु बृहस्पति की अनुकम्पा का दिन है गुरुवार- फोटो : social Media

Religion:वैदिक काल से ही भगवान विष्णु को संपूर्ण विश्व की सर्वोच्च सत्ता स्वीकार किया गया है। गुरुवार के दिन उनकी पूजा विधि-विधान, व्रत और उपवास के साथ करने से उनकी असीम कृपा भक्तों पर बरसती है। प्रातःकाल स्नान-आदि से निवृत्त होकर शुद्ध मन, वचन और कर्म से पूजन करना चाहिए। बृहस्पति देव की पूजा पीले पुष्प, चने की दाल, पीली मिठाई, पीले चावल, हल्दी एवं केले के वृक्ष के पूजन द्वारा करनी चाहिए। कथा एवं पूजन के समय भगवान श्रीहरि विष्णु से श्रद्धापूर्वक मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करने से जीवन में धर्म, भाग्य और आनंद का उदय होता है।सनातन हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिवस किसी न किसी देवता को समर्पित है। इन्हीं में बृहस्पतिवार का विशेष महत्त्व है, जो जगत् के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु तथा समस्त देवताओं के गुरु देवगुरु बृहस्पति को अर्पित है। भगवान विष्णु त्रिलोकीनाथ हैं-भूः, भुवः और स्वः-तीनों लोकों के स्वामी। वे समस्त सृष्टि के पालन, रक्षण एवं पोषणकर्ता हैं। जिनकी कृपा से धर्म की प्रतिष्ठा, जीवन की मर्यादा और आत्मा की शुद्धि संभव होती है।

बृहस्पतिवार को विधिपूर्वक भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन के समस्त कष्ट, क्लेश एवं विघ्न शांत होते हैं। धन-धान्य, ऐश्वर्य, मान-प्रतिष्ठा, संतान-सुख, माता लक्ष्मी की कृपा, मानसिक शांति तथा अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिवस विष्णु सहस्त्रनाम का श्रद्धापूर्वक पाठ अत्यंत प्रभावशाली एवं फलदायी माना गया है। साथ ही श्रीमद्भागवत महापुराण का पाठ विशेष पुण्य प्रदान करता है। बृहस्पतिवार को भगवान श्रीराम एवं भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करना भी श्रेष्ठ और कल्याणकारी कहा गया है, क्योंकि वे स्वयं विष्णु के अवतार हैं।

देवगुरु बृहस्पति ज्ञान, बुद्धि, विवेक और शिक्षा के अधिष्ठाता देव हैं। उनकी उपासना से अध्ययन में अभिरुचि, समाज में सम्मान, पारिवारिक सौहार्द, दांपत्य सुख, आध्यात्मिक उन्नति तथा धर्माचरण की प्रवृत्ति बढ़ती है। जिनकी कुंडली में बृहस्पति सुदृढ़ होता है, उनका जीवन सदैव धर्म, नीति और समृद्धि की ओर अग्रसर रहता है।भगवान बृहस्पति की अनुकम्पा से विवाह योग प्रबल होता है तथा दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सौहार्द की वृद्धि होती है। जिनके वैवाहिक जीवन में क्लेश या विलंब है, उनके लिए गुरुवार का व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है। देवगुरु बृहस्पति न केवल अपने भक्तों के दुःख-दरिद्रता का नाश करते हैं, अपितु उन्हें दीर्घायु, सद्बुद्धि और उत्तम संस्कार भी प्रदान करते हैं। अतः गुरुवार को उनका ध्यान, जप और व्रत करना अति आवश्यक बताया गया है। जिन व्यक्तियों की मानसिक प्रवृत्ति उथली, चंचल या असंयमित हो, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से कल्याणकारी होता है।

बृहस्पतिवार के दिन भगवान विष्णु का व्रत विधि-विधान से करना अत्यंत फलप्रद माना गया है। इस दिन पीतवर्ण वस्तुएँ हल्दी, केसर, गुड़, चना, केला, पीले वस्त्र, देसी घी, तुलसी की माला का दान करने से ग्रहदोष शांत होते हैं और जीवन में स्थिरता एवं समृद्धि आती है। व्रती को दिन में एक समय ही भोजन करना चाहिए, वह भी चने की दाल से युक्त, तथा नमक का त्याग करना चाहिए।

इस दिन पुरुषों को बाल या दाढ़ी नहीं बनवानी चाहिए। पीले पुष्प, पीला चंदन, पीले वस्त्र एवं चने की दाल से पूजन करना शुभ माना गया है। व्रत में केले के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है। पीतवस्त्र धारण करना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि यह रंग भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस प्रकार श्रद्धा, नियम और संयम से किया गया बृहस्पतिवार व्रत जीवन को धर्म, वैभव और मोक्ष की ओर ले जाता है।

सनातन वैदिक परंपरा में गुरुवार का दिन अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना गया है। यह दिवस देवगुरु बृहस्पति एवं जगत् के पालनकर्ता भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। जिन जातकों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह दुर्बल होता है अथवा जिनके भाग्य में अवरोध, विलंब और कष्ट विद्यमान रहते हैं, उनके लिए गुरुवार को बृहस्पति देव की पूजा अर्चना विशेष फलदायी सिद्ध होती है। शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है कि बृहस्पति ही भाग्य के जागरण के कारक हैं; उनकी कृपा से जीवन में शुभता, स्थिरता और धर्म का संचार होता है।