गुरु पूर्णिमा पर पटना के गंगा घाटों पर उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गुरु वंदना और गंगा स्नान के लिए जुटे हजारों श्रद्धालु

गुरु पूर्णिमा पर बुधवार को पटना के दीघा मरीन ड्राइव स्थित जेपी सेतु घाट, गांधी घाट, कलेक्ट्रेट घाट, कृष्णा घाट, एनआईटी घाट समेत पटना सिटी के विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।

Guru Purnima 2026
Guru Purnima 2026- फोटो : news4nation

Guru Purnima : राजधानी पटना में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ब्रह्म मुहूर्त से ही लोग पवित्र गंगा में स्नान करने के लिए विभिन्न घाटों पर पहुंचने लगे। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और महर्षि वेद व्यास के साथ-साथ अपने गुरुजनों का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।


दीघा मरीन ड्राइव स्थित जेपी सेतु घाट, गांधी घाट, कलेक्ट्रेट घाट, कृष्णा घाट, एनआईटी घाट समेत पटना सिटी के विभिन्न गंगा घाटों पर सुबह से ही श्रद्धा और भक्ति का वातावरण देखने को मिला। हर-हर गंगे और गुरु वंदना के जयघोष से पूरा घाट क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने परिवार के साथ गंगा स्नान कर सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और ज्ञान की कामना की।


श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। घाटों पर पुलिस बल, मजिस्ट्रेट, गोताखोर और आपदा प्रबंधन की टीमें तैनात की गई हैं ताकि स्नान और पूजा-अर्चना के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। घाटों पर साफ-सफाई, बैरिकेडिंग और यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया।


इस बार की गुरु पूर्णिमा क्यों है खास?

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। यह दिन महर्षि वेद व्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। वेदों के विभाजन, महाभारत और अठारह पुराणों की रचना का श्रेय महर्षि वेद व्यास को दिया जाता है। इसी कारण उन्हें 'आदि गुरु' माना जाता है और उनके सम्मान में इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है।


धार्मिक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का दिन नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और आत्मिक उन्नति का भी पर्व है। इस दिन अपने गुरु, शिक्षकों और मार्गदर्शकों का सम्मान करने तथा उनका आशीर्वाद लेने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विद्या, सफलता और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान पूजनीय माना गया है, इसलिए इस पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।

अनिल की रिपोर्ट