रक्षाबंधन 2026: भद्रा-मुक्त श्रावणी पूर्णिमा पर भ्रातृ-भगिनी स्नेह का पावन पर्व, जानें सर्वोत्कृष्ट शुभ मुहूर्त एवं शास्त्रीय विधान
Raksha Bandhan 2026: भारतीय सनातन संस्कृति में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का अत्यंत विशिष्ट शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह पुनीत तिथि 'रक्षाबंधन' अथवा 'श्रावणी पर्व' के रूप में उल्लासपूर्वक परिपालित की जाती है। ...
Raksha Bandhan 2026: भारतीय सनातन संस्कृति में श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का अत्यंत विशिष्ट शास्त्रीय एवं आध्यात्मिक महत्व है। यह पुनीत तिथि 'रक्षाबंधन' अथवा 'श्रावणी पर्व' के रूप में उल्लासपूर्वक परिपालित की जाती है। इस पावन अवसर पर भगिनी (बहन) अपने भ्राता (भाई) की कलाई पर मंगल रक्षासूत्र (राखी) बन्धन कर उसके दीर्घायु, आरोग्य एवं सुखद भावी जीवन की आत्मीय कामना करती है। प्रत्युत्तर में, भ्राता भी अपनी भगिनी के जीवन-पर्यन्त रक्षण तथा संवर्धन का दृढ संकल्प ग्रहण करता है। इस वर्ष उदया तिथि के मान एवं शास्त्रीय गणना के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा का यह पर्व सर्वथा भद्रा-मुक्त एवं मांगलिक योगों से परिपूर्ण है।
भद्रा-रहित काल एवं शास्त्रीय मान्यता
धर्मशास्त्रों तथा पंचांगीय सिद्धान्तों के अनुसार रक्षाबंधन अनुष्ठान में 'भद्रा काल' का परित्याग अनिवार्य माना गया है। शास्त्रों का स्पष्ट कथन है—
"भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।"
अर्थात् भद्रा काल में श्रावणी (रक्षाबंधन) तथा फाल्गुनी (होलिका दहन) दोनों ही वर्जित हैं। भद्रा काल में रक्षासूत्र बन्धन से राजा एवं प्रजा दोनों के लिए अनिष्ट की सम्भावना रहती है।परम सौभाग्य की बात यह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व सर्वथा भद्रा दोष से मुक्त है। पंचांगीय गणनानुसार भद्रा काल पूर्व दिवस (27 अगस्त) को ही रात्रि 09:32 बजे समाप्त हो चुका है। अतः 28 अगस्त को सम्पूर्ण दिन भद्रा का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं रहेगा। साधक एवं श्रद्धालु जन बिना किसी संशय के सम्पूर्ण दिवस रक्षासूत्र बन्धन का मांगलिक कार्य सम्पन्न कर सकते हैं।
उदया तिथि, राहुकाल एवं शिवोपासना का महत्व
यद्यपि पूर्णिमा तिथि प्रातः 09:48 बजे (हृषिकेश पंचांगानुसार प्रातः 09:18 बजे) तक ही विद्यमान है, किन्तु शास्त्रानुसार 'उदया तिथि' का मान सम्पूर्ण दिवस ग्राह्य होता है।
राहुकाल समय: प्रातः 10:54 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक राहुकाल व्याप्त रहेगा। शास्त्रीय मान्यतानुसार राहुकाल की अवधि में शुभ अनुष्ठान स्थगित रखना श्रेयस्कर होता है।
शिव पूजन एवं जलाभिषेक: श्रावण पूर्णिमा श्रावण मास का अंतिम दिवस भी है। इसके पश्चात भाद्रपद मास का शुभारंभ होता है। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव का विधिवत पंचामृत अभिषेक, दूधाभिषेक तथा जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी एवं मनोवांछित फलप्रद सिद्ध होता है।
शुभ मुहूर्त
मुहूर्त प्रकार समय सीमा (28 अगस्त 2026) शास्त्रीय विशिष्टता
सर्वोत्कृष्ट पंचांगीय मुहूर्त प्रातः 05:57 बजे से 09:48 बजे तक पूर्णिमा तिथि एवं अमृत योग
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त प्रातः 09:10 बजे से 09:48 बजे तक विशेष फलदायी एवं मंगलकारी
अमृत चौघड़िया प्रातः 06:08 बजे से 10:53 बजे तक शुभ कार्यों हेतु प्रशस्त
अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक सर्वदोष निवारक मुहूर्त
अपराह्न काल मुहूर्त दोपहर 01:44 बजे से सायंकाल 04:16 बजे तक शास्त्रीय रक्षासूत्र बन्धन काल
चर चौघड़िया सायंकाल 05:13 बजे से 06:48 बजे तक सायं कालीन शुभ समय
इस बार रक्षाबंधन पर्व पर किसी भी प्रकार के ग्रहण अथवा भद्रा का साया न होने के कारण वातावरण अत्यंत सकारात्मक एवं ऊर्जावान है। राहुकाल (प्रातः 10:54 से दोपहर 12:28) का परिहार करते हुए अपनी सुविधा एवं इच्छित चौघड़िया के अनुसार रक्षासूत्र बाँधना सर्वथा शुभ, समृद्धिकारक एवं कल्याणकारी रहेगा।