बिहार के सरकारी स्कूलों में अब मिड-डे मील में नहीं मिलेगा बैंगन, भिंडी और साग... इस कारण हुआ फैसला
बिहार में मिड-डे मील के तहत करीब 67 हजार सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में 1.65 करोड़ नामांकित छात्र-छात्राओं को मिलता है जिन्हें अब बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और किसी भी प्रकार का साग परोसा नहीं जाएगा
Bihar Mid-Day Meals : बिहार के सरकारी स्कूलों में अब मिड-डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और किसी भी प्रकार का साग परोसा नहीं जाएगा। मध्याह्न भोजन योजना (एमडीएम) के निदेशक विनायक मिश्र ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को निर्देश जारी किया है।
शिक्षा विभाग ने मानसून के मौसम को देखते हुए यह फैसला लिया है। विभाग का कहना है कि बरसात के दौरान इन सब्जियों में संक्रमण और कीड़े लगने की आशंका अधिक रहती है, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। आदेश में कहा गया है कि बारिश के मौसम में बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए मिड-डे मील में बैंगन, भिंडी, पत्ता गोभी और सभी प्रकार के पत्तेदार साग का उपयोग तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए।
मानकों का सख्ती से पालन
शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि इन सब्जियों के स्थान पर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ताजी, स्वच्छ और सुरक्षित मौसमी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही भोजन तैयार करने के दौरान साफ-सफाई, ताजी सामग्री के उपयोग और खाद्य सुरक्षा के सभी मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।
संक्रमण तेजी से पनपने की आशंका
विभाग के अनुसार, मानसून के दौरान पत्तेदार सब्जियों और कुछ अन्य हरी सब्जियों में नमी के कारण बैक्टीरिया, फफूंद और अन्य संक्रमण तेजी से पनपने की आशंका रहती है। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से बच्चों में फूड पॉइजनिंग और अन्य खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी जोखिम को देखते हुए यह एहतियाती फैसला लिया गया है।
1.65 करोड़ स्टूडेंट्स को लाभ
बिहार में पीएम पोषण (पूर्व में मिड-डे मील) योजना के तहत करीब 67 हजार सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में प्रतिदिन मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इस योजना का लाभ लगभग 1.65 करोड़ नामांकित छात्र-छात्राओं को मिलता है, जिससे यह देश की सबसे बड़ी स्कूल पोषण योजनाओं में से एक है।
गुणवत्ता की नियमित निगरानी
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को यह भी निर्देश दिया है कि स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। विभाग का कहना है कि बरसात के पूरे मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।