Bihar Education Scam: स्कूलों तक नहीं पहुंची खेल सामग्री, लेकिन फंड हो गया साफ!शिक्षा में बड़ा घोटाला उजागर
Bihar Education Scam: स्कूलों में बच्चों के शारीरिक विकास के लिए भेजी गई खेल सामग्री की राशि में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता से जुड़ा है। ..
Bihar Education Scam: मोतिहारी जिले में शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला स्कूलों में बच्चों के शारीरिक विकास के लिए भेजी गई खेल सामग्री की राशि में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितता से जुड़ा है। आरोप है कि वेंडर, अधिकारी और हेडमास्टर (एचएम) की मिलीभगत से पूरी प्रक्रिया को ‘घोटाले’ का रूप दे दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, प्राथमिक, मध्य और उच्च विद्यालयों के बच्चों के लिए सरकार द्वारा खेल सामग्री खरीदने हेतु ₹5,000, ₹10,000 और ₹25,000 तक की राशि स्कूल शिक्षा समिति के खातों में भेजी गई थी। नियम के मुताबिक यह राशि पीएफएमएस/पीपीए के माध्यम से निकासी कर गुणवत्तापूर्ण खेल सामग्री खरीदने में खर्च होनी थी।
लेकिन आरोप है कि मार्च महीने में ही इस पूरी प्रक्रिया में ‘सिस्टम’ के भीतर ही खेल शुरू हो गया। वेंडर चयन से लेकर भुगतान तक में कथित तौर पर प्रखंड स्तर पर सेटिंग की गई। बताया जा रहा है कि अधिकारियों द्वारा अपने स्तर पर वेंडर तय किए गए और एचएम पर दबाव बनाकर या प्रलोभन देकर राशि की निकासी करवाई गई।स्थानीय स्तर पर यह भी दावा किया जा रहा है कि कई स्कूलों में न तो पूरी खेल सामग्री पहुंची और जहां कुछ सामग्री भेजी भी गई, वह राशि के मुकाबले काफी कम और निम्न गुणवत्ता की थी। कई विद्यालयों में अब तक आपूर्ति ही नहीं हुई है, जिससे छात्रों के खेलकूद कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पताही बीईओ का एक कथित वायरल मैसेज सोशल मीडिया पर सामने आया। इस संदेश में बताया गया कि खेल सामग्री के लिए वेंडर का चयन जिला शिक्षा पदाधिकारी के निर्देशानुसार किया जाएगा और जब तक निर्णय नहीं होता, तब तक फंड की निकासी नहीं होगी। साथ ही यह भी लिखा गया कि अगर बिना अनुमति निकासी हुई तो रिकवरी की जाएगी।हालांकि इस वायरल मैसेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसने शिक्षा विभाग में चल रहे कथित गड़बड़झाले पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और शिक्षक वर्ग इसे “सिस्टम के अंदर की पोल खोल” बता रहे हैं।
यह भी सामने आया है कि पहले भी जिले में बेंच-डेस्क घोटाला, बिना स्कूल मरम्मत के करोड़ों की निकासी, समरसेबल बोरिंग और थाली घोटाला जैसे मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से कुछ मामलों में कार्रवाई भी हुई थी एक तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी को निलंबित किया गया था, जबकि कुछ अधिकारियों पर प्रपत्र ‘क’ गठित हुआ था। लेकिन कई मामलों की जांच रिपोर्ट कथित तौर पर अब भी लंबित पड़ी है।
ताजा मामले में जिला स्तर पर कुछ एचएम से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है और जांच की बात कही जा रही है। अधिकारी स्तर पर यह संकेत दिया गया है कि यदि सूक्ष्म जांच हुई तो बड़ी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। फिलहाल शिक्षा विभाग के इस कथित खेल ने एक बार फिर पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण और शिक्षा से जुड़े लोग मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो, ताकि बच्चों के अधिकारों के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ न हो सके।
रिपोर्ट- हिमांशु कुमार