मनरेगा कर्मियों का महाधरना दूसरे दिन भी जारी: मांगें पूरी न होने पर 17 जून से आमरण अनशन की चेतावनी, 19 को बनेगी मानव श्रृंखला

मनरेगा कर्मियों का महाधरना दूसरे दिन भी जारी: मांगें पूरी न
अपनी मांगों पर अड़े मनरेगा कर्मी- फोटो : न्यूज4नेशन

Ranchi : झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर राजधानी रांची में चल रहा राज्य स्तरीय महाधरना दूसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। राज्य के विभिन्न जिलों, विशेषकर संताल परगना प्रमंडल से भारी संख्या में पहुंचे मनरेगा कर्मियों ने राजभवन के समक्ष अपनी मांगों के समर्थन में जबरदस्त एकजुटता दिखाई। आंदोलनरत कर्मियों ने अब आर-पार की लड़ाई का एलान करते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लिया गया, तो बुधवार 17 जून से वे आमरण अनशन शुरू करने पर मजबूर होंगे।


सालों से मिल रहा सिर्फ आश्वासन, विभागीय वार्ता के बाद भी नहीं निकला नतीजा

महाधरना स्थल पर जुटे कर्मचारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए आक्रोश व्यक्त किया। आंदोलन में शामिल कर्मियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी जायज समस्याओं के समाधान की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर शांत करा दिया जाता है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि बीते 25 मई 2026 को विभागीय स्तर पर उच्चाधिकारियों के साथ हुई वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सकारात्मक सहमति बनी थी। उस वक्त कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि उनके अच्छे दिन आने वाले हैं, लेकिन इतने दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश या ठोस पहल नहीं की गई, जिससे हजारों मनरेगा कर्मियों में भारी असंतोष है।


ग्रेड-पे, स्थायीकरण और अनुकंपा बहाली समेत कई मांगें लंबित

महाधरना को संबोधित करते हुए संघ के शीर्ष नेताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया। उन्होंने कहा कि मनरेगा कर्मी कई वर्षों से मानदेय की जगह ग्रेड-पे आधारित सम्मानजनक वेतन व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही उनकी मुख्य मांगों में-

  • संविदा पर कार्यरत कर्मियों का स्थायी समायोजन (नियमितीकरण) करना।
  • नौकरी की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • सेवाकाल के दौरान दिवंगत हुए कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियोजन देना।

नेताओं ने जोर देकर कहा कि झारखंड की ग्रामीण विकास योजनाओं और धरातल पर मनरेगा को सफल बनाने में इन कर्मियों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका रही है, लेकिन इसके बावजूद इन्हें सम्मानजनक मानदेय और भविष्य की सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।


17 जून से भूख हड़ताल और 19 जून को राजभवन से जयपाल सिंह स्टेडियम तक बनेगी मानव श्रृंखला

संघ के प्रतिनिधियों ने आंदोलन के आगामी कड़े रुख की घोषणा करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने के बावजूद सरकार की उदासीनता के कारण वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं। तय रणनीति के अनुसार, यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 17 जून से कर्मचारी आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर बैठ जाएंगे। इसके बाद भी बात नहीं बनी, तो आगामी 19 जून को राजभवन से लेकर जयपाल सिंह स्टेडियम तक एक विशाल ऐतिहासिक मानव श्रृंखला बनाई जाएगी, ताकि सरकार का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर मजबूती से आकर्षित किया जा सके।


प्रशासनिक कार्रवाई की धमकी से बढ़ा रोष, मांगें पूरी होने तक थमेगा नहीं आंदोलन

कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि एक तरफ सरकार उनकी उचित मांगें ठंडे बस्ते में डाल रही है, तो दूसरी तरफ शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कर्मियों पर प्रशासनिक दबाव बनाने और निलंबन जैसी कार्रवाई करने की धमकियां दी जा रही हैं। इस तानाशाही रवैये से कर्मचारियों के बीच निराशा और गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया है। मनरेगा कर्मचारी संघ ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि राज्य के हजारों कर्मी अपने अधिकारों और सुरक्षित भविष्य के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लड़ रहे हैं। जब तक उनकी लंबित मांगों पर सरकार कोई ठोस और धरातलीय निर्णय नहीं लेती, तब तक यह आंदोलन पीछे नहीं हटेगा और जरूरत पड़ने पर इसे पूरे राज्य में और व्यापक रूप दिया जाएगा।