Health News: बिहार में लोगों की सेहत पर संकट! घंटों पेशाब रोकने से इस अंग पर खतरा, आंकड़े जान कर चौक जाएंगे आप

Health News: बिहार में सार्वजनिक शौचालयों की कमी और गंदगी सेहत के लिए गंभीर परेशानी बनती जा रही है।...

 Dr rohit Upadhayay
बिहार में लोगों की सेहत पर संकट! - फोटो : reporter

Health News: बिहार में सार्वजनिक शौचालयों की कमी और गंदगी सेहत के लिए गंभीर परेशानी बनती जा रही है। खासकर घर से बाहर निकलकर नौकरी करने वाली महिलाओं को साफ-सुथरे और सुरक्षित शौचालय नहीं मिलने के कारण घंटों पेशाब रोककर रखने की मजबूरी झेलनी पड़ रही है। इसका असर उनके मूत्र तंत्र पर पड़ रहा है और संक्रमण से लेकर किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। पुलिसकर्मी, शिक्षिकाएं, दुकानों में काम करने वाली महिलाएं और निजी कार्यालयों में नौकरी करने वाली महिलाएं इस समस्या से जूझ रही हैं। सार्वजनिक सुविधाओं की कमी अब महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा से जुड़ा अहम सवाल बन गई है।

3.56 लाख महिलाओं के अध्ययन में दो लाख में किडनी संबंधी समस्याएं

यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ बिहार चैप्टर के एक अध्ययन के मुताबिक, जनवरी 2025 से अगस्त 2026 के बीच छह मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचीं 3.56 लाख महिलाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें करीब दो लाख महिलाओं में किडनी संबंधी समस्याएं सामने आने की बात कही गई है। अध्ययन में लंबे समय तक पेशाब रोककर रखने की आदत को इन स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया।हालांकि, ये आंकड़े अस्पतालों की ओपीडी में पहुंचीं महिलाओं से संबंधित हैं।

तीन से चार घंटे तक पेशाब रोकने की मजबूरी

कामकाजी महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार्यस्थल और सार्वजनिक जगहों पर शौचालयों का अभाव है। कई जगह शौचालय मौजूद भी हैं तो वहां साफ-सफाई, पानी और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था नहीं होती। ऐसे में महिलाएं मजबूरी में तीन से चार घंटे तक पेशाब रोककर रखती हैं। लगातार ऐसी स्थिति बनी रहने से उनकी दिनचर्या, कार्यक्षमता और स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।

डॉ. रोहित उपाध्याय ने बताए गंभीर खतरे

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस), पटना के यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रोहित उपाध्याय के अनुसार, लंबे समय तक पेशाब रोककर रखने से मूत्र तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इससे मूत्र मार्ग में संक्रमण (यूटीआई) और पेशाब से जुड़ी दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। संक्रमण गंभीर होने या किडनी तक पहुंचने की स्थिति में गुर्दे भी प्रभावित हो सकते हैं।

महिला शौचालयों की मांग तेज, व्यवस्था सुधारने की जरूरत

इस समस्या ने बिहार में महिला सार्वजनिक शौचालयों की उपलब्धता, स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। जरूरत ऐसे शौचालयों की है जहां साफ पानी, नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित हो। बाजारों, बस स्टैंडों, सरकारी कार्यालयों और कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।

साफ सार्वजनिक शौचालय केवल सुविधा नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और समान अवसरों से जुड़ा बुनियादी अधिकार है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस समस्या को गंभीरता से लें और ऐसी व्यवस्था विकसित करें, जिससे किसी महिला को नौकरी या सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियां निभाते समय अपनी सेहत दांव पर लगाने की मजबूरी न झेलनी पड़े।