Chhath Geet: इस भोजपुरी गीत के बिना अधूरा लगता है छठ महापर्व, जानिए इसके बोल...
छठ पर्व में छठी मईया के गीतों की गूंज के बिना यह अधूरा लगता है। इस महापर्व में "पहिले पाहिले हम कईनी छठी मईया व्रत तोहार" जैसे भक्ति गीत खास महत्व रखते हैं। आइए जानते हैं इस खूबसूरत गीत के पूरे बोल।

Chaiti Chhath 2025 : चैती छठ पूजा गीत: छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है, एक बार चैत्र माह में और दूसरी बार कार्तिक माह में। अभी चैत्र माह चल रहा है, इसलिए इसी महीने में चैती छठ पर्व मनाया जाएगा। इस पर्व में भगवान सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। महिलाएं निर्जला व्रत रखकर छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में छठी मैया के गीत जरूर सुने जाते हैं। आइए आपको बताते हैं छठ के लोकप्रिय गीतों के बारे में।
छठ पूजा में गीतों का विशेष महत्व है, जो छठी मईया की कृपा, भक्तों की श्रद्धा और व्रत की महिमा का वर्णन करते हैं। इन गीतों के बोलों में परिवार की समृद्धि, सुख और आशीर्वाद की कामना की गई है। "पहिले पाहिले हम कईनी" गीत खासकर नए व्रतधारियों की भक्ति और छठी मईया के प्रति उनकी भावनाओं को दर्शाता है।
चैती छठ पूजा गीत ( पाहिले पाहिले हम कईनी छठी मईया व्रत तोहार )
पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर,छठी मईया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।
गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार, छठी मईया ममता-दुलार।
पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार, मैया दिहा सुख सार।
नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार, साजल नदिया किनार।
सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार, बढ़े कुल परिवार।
घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार, मैया तोरा भगती अपार।
लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार, दिहीं आशीष हजार।
पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर, छठी मैया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।
ये गीत भो गाए जाते हैं
इसके अलावा "केलवा के पात पर उगेलें सूरज देव" उगते हुए सूर्य देव की स्तुति में गाया जाता है, जो छठ पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। "पटना के घाट पर" पटना के घाटों पर छठ पूजा के दौरान होने वाले उत्साह और भक्ति को दर्शाता है। "उग हो सूरज देव भइल अरघ के बेर" सूर्य देव को अर्घ्य देने के महत्व को बताता है, जो छठ पूजा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। "कांच ही बांस के बहंगिया" छठ पूजा के दौरान उपयोग किए जाने वाले बांस के टोकरे, बहंगी के महत्व को दर्शाता है, जिसमें प्रसाद रखा जाता है