Health News: हर महीने आ रहे थे पीरियड्स,फिर भी 12 हफ्ते की प्रेग्नेंट! जानिए इस हैरतअंगेज ब्लीडिंग का सच,लापरवाही पड़ सकती है भारी

Health News: गर्भावस्था की खबर किसी भी महिला के लिए बेहद खास होती है, लेकिन सोचिए अगर किसी महिला को हर महीने ब्लीडिंग हो रही हो और उसे अचानक पता चले कि वह 12 हफ्ते (3 महीने) की प्रेग्नेंट है?...

Subchorionic Hemorrhage
सबकोरियोनिक हेमरेज- फोटो : Epsita

Health News: गर्भावस्था की खबर किसी भी महिला के लिए बेहद खास होती है, लेकिन सोचिए अगर किसी महिला को हर महीने ब्लीडिंग हो रही हो और उसे अचानक पता चले कि वह 12 हफ्ते (3 महीने) की प्रेग्नेंट है? ऐसा ही एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया, जिसने महिलाओं को अपने जिस्म  के इशारों को समझने पर मजबूर कर दिया है। महिला का सबसे बड़ा सवाल था कि जब हर महीने माहवारी आ रही थी, तो फिर वह गर्भवती कैसे हो सकती है?गाइनेकोलॉजिस्ट के पास जब यह केस आया, तो उन्होंने इस उलझन की परतें खोलीं और बताया कि हकीकत में हर ब्लीडिंग पीरियड्स नहीं होती।

पीरियड्स और स्पॉटिंग में बारीक फर्क

अक्सर औरतें हल्की स्पॉटिंग (रक्त के धब्बे) को ही नॉर्मल पीरियड्स मान लेती हैं। इस केस में भी महिला को ब्लीडिंग तो हो रही थी, लेकिन वह पहले की तरह खुलकर नहीं आ रही थी। डॉक्टर ने जब तहकीकात की, तो पता चला कि ब्लीडिंग केवल कुछ बूंदें या हल्की स्पॉटिंग के रूप में थी।सामान्य मासिक धर्म 4 से 5 दिनों तक चलता है और उसका फ्लो  एक जैसा रहता है। अगर फ्लो अचानक बहुत कम हो जाए या सिर्फ दाग दिखाई दें, तो इसे सामान्य पीरियड्स मानने की भूल न करें।

क्या होता है सबकोरियोनिक हेमरेज

डॉक्टर के मुताबिक, इस तरह की ब्लीडिंग की एक बड़ी वजह सबकोरियोनिक हेमरेज हो सकती है।सरल भाषा में समझें तो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय की दीवार और गर्भ की थैली के बीच खून जमा हो जाता है।यह जमा हुआ रिसाव धीरे-धीरे योनि के जरिए बाहर निकलता रहता है, जिसे महिलाएं पीरियड्स समझने की गलती कर बैठती हैं।हालांकि, प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लीडिंग के और भी कई मेडिकल कारण हो सकते हैं, इसलिए खुद से कोई नतीजा निकालना सही नहीं है।

शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें

हर महिला का शरीर प्रेग्नेंसी के प्रति अलग प्रतिक्रिया देता है। कुछ महिलाओं को सुबह मतली , उल्टी, कमजोरी या स्तनों में भारीपन महसूस होता है, जबकि कुछ में ये लक्ष्ण बेहद हल्के होते हैं। यदि ब्लीडिंग के साथ-साथ आपको थकान और चक्कर आने जैसी दिक्कत हो रही है, तो फौरन चौकन्ना हो जाना चाहिए।

लापरवाही पड़ सकती है भारी

गर्भावस्था में ब्लीडिंग हमेशा खतरनाक नहीं होती,लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। अगर ब्लीडिंग के साथ तेज पेट दर्द, चक्कर, बेहोशी या कंधे में दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सबसे आसान तरीका: प्रेग्नेंसी टेस्ट

अगर पीरियड्स का पैटर्न बदल गया है, तो घर पर यूपीटी  करना सबसे पहला और आसान कदम है। टेस्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के जरिए बच्चे की धड़कन और सबकोरियोनिक हेमरेज की सही स्थिति का पता लगाते हैं। हर महीने ब्लीडिंग हो रही है तो प्रेग्नेंसी नहीं हो सकती यह सोच गलत साबित हो सकती है। सेहत में जरा सा भी गैर-मामूली  बदलाव दिखे, तो वक्त पर डॉक्टर की सलाह जरूर लें।