30 साल के तेजस्वी के पीछे 74 साल के बुजुर्ग का 'दिमाग', जानें किसके सहारे है राजद की नाव

30 साल के तेजस्वी के पीछे 74 साल के बुजुर्ग का 'दिमाग', जानें किसके सहारे है राजद की नाव

DESK: बिहार में पिछले 3 दशकों में यह पहली बार है जब बिहार का कोई चुनाव किंगमेंकर  लालू प्रसाद यादव  की गैरमौजूदगी में लड़ा जा रहा है. लालू ने हालांकि 2015 में ही अपने दोनों बेटों को राजनीति में लॉन्च कर दिया था, लेकिन उनकी अनुपस्थिति में बेटे राजद की राजनीति को आगे ले जाएंगे, इसको लेकर सियासी जानकार एकमत नहीं थे. बिहार की सियासी फिजां में तैरती इन बातों को राजधानी पटना से दूर रांची में बैठे लालू ने भी संभवतः सूंघ लिया था. इसलिए साल 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव  की सुगबुगाहट शुरू होने से बहुत पहले ही उन्होंने अपनी पार्टी की कमान एक ऐसे बुजुर्ग के हाथ में सौंपी, जो उनकी जाति (यादव) का  तो नहीं था. लेकिन बिहार के गिने-चुने अनुभवी नेताओं में से एक था. लालू प्रसाद ने राजद के बिहार अध्यक्ष की कमान 74 साल के बुजुर्ग राजनीतिज्ञ जगदानंद सिंह  को दी.


आपको बता दें कि यह पहली बार हुआ  कि राजद में किसी राजपूत नेता को इतने बड़े पद पर बैठाया गया. न सिर्फ सियासी हलकों में, बल्कि राजद में भी इसकी वजह से हलचल हुई. पूर्व केंद्रीय मंत्री और राजद के दिग्गज नेता दिवंगत रघुवंश प्रसाद सिंह  इस वजह से नाराज भी हुए. लेकिन लालू ने इन बातों को अनदेखा कर पिछले साल नवंबर में जगदा बाबू की ताजपोशी कर दी. राजद की बिहार इकाई की कमान संभालने के बाद लालू के इस पुराने सिपहसालार ने अगले कुछ महीनों में जब अपनी कार्यशैली का मुजाहिरा किया, तभी से इस बात के संकेत मिलने लगे थे कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आरजेडी अलग तेवर में दिख सकती है. बिहार में विधानसभा चुनाव के औपचारिक ऐलान और सियासी संग्राम छिड़ने के बाद महागठबंधन की ओर से जब तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की घोषणा की गई और इस पर आरजेडी ने जो स्टैंड लिया, इससे पार्टी के आक्रामक चुनावी अभियान का आगाज हो गया. आज लालू की गैर मौजूदगी में भी बिहार के मतदाता 30 साल के तेजस्वी यादव के जिस आक्रामक तेवर को अनुभव कर रहे हैं, उसके पीछे दरअसल इस बुजुर्ग और अनुभवी नेता का दिमाग है.

राजद के संस्थापक और लालू के वफादार

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राजद के संस्थापक सदस्यों में से एक जगदानंद सिंह के राजनीतिक कौशल की पहचान 2009 के लोकसभा चुनाव में सबने देखी है. उस चुनाव में लालू यादव ने अपने इस वफादार नेता को बक्सर से उतारा और जगदा बाबू ने भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर उम्मीदवार लालमुनि चौबे को चुनाव में धूल चटा दी थी. 1996 से लगातार बक्सर से सांसद चुने जाते आए चौबे के लिए यह बड़ा झटका था. रिपोर्ट के मुताबिक, जगदा बाबू के लिए पार्टी हमेशा परिवार से ऊपर रही है. यहां तक कि पार्टी के प्रति वफादारी की वजह से ही उन्होंने अपने बेटे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरना स्वीकार किया. 2010 के विधानसभा चुनाव में वह रामगढ़ सीट पर अपने बेटे सुधाकर सिंह के खिलाफ राजद के उम्मीदवार थे. बेटे को बीजेपी ने चुनाव में उतार दिया था. यह अलग बात है कि इस बार के चुनाव में सुधाकर सिंह उसी रामगढ़ विधानसभा सीट से आरजेडी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं.

समर्पित नेता की रही है पहचान

बिहार के सबसे चर्चित राजनैतिक परिवार यानी लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के प्रति जगदानंद सिंह किस कदर भरोसेमंद हैं, इसे कुछ और तथ्यों से भी समझा जा सकता है. लालू यादव ने मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बनाया था. उस समय भी जगदानंद सिंह की भूमिका काफी अहम रही थी. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक राजद के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि राबड़ी देवी के मुख्यमंत्रित्व काल में सत्ता की कमान जगदा बाबू के ही हाथ में रही. उस समय लालू को किसी ऐसे शख्स की दरकार थी जो उनके न रहने पर भी परिवार का भरोसेमंद रहे. जगदा बाबू इस कसौटी पर खरे उतरे थे. राजद के नेता ने कहा कि यही वजह है कि आज जब तेजस्वी यादव की अगुआई में विधानसभा चुनाव लड़ा जा रहा है, तो लालू ने एक बार फिर अपने इसी साथी पर भरोसा जताया है.

आरजेडी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि जगदा बाबू की पहचान बिहार में मास-लीडर की नहीं है. लेकिन उनका कुशल राजनीतिक दिमाग उन्हें अन्य लोगों के मुकाबले बेहतर साबित करता रहा है. उन्होंने कहा कि जगदानंद सिंह के फैसले इतने तार्किक और सटीक होते हैं कि उन पर किसी आम नेता या कार्यकर्ता के लिए बहस करना मुश्किल है. बहरहाल, बिहार में 28 अक्टूबर को पहले चरण का मतदान है. इसके बाद 3 और 7 नवंबर को दूसरे और तीसरे फेज की वोटिंग होगी. 10 नवंबर को चुनाव के नतीजे आएंगे. सियासी जानकारों को इस बात का इंतजार है कि तेजस्वी यादव के आक्रामक चुनावी अभियान के पीछे इस बुजुर्ग नेता ने जो फील्डिंग सजाई है, उसका परिणाम कैसा रहता है.

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