माओवादी नेता की गिरफ्तारी के बाद गुस्से में नक्सली, रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया, गनीमत है कि नहीं हुआ कोई हादसा

माओवादी नेता की गिरफ्तारी के बाद गुस्से में नक्सली, रेलवे ट्रैक को बम से उड़ाया, गनीमत है कि नहीं हुआ कोई हादसा

DHANBAD : नक्सलियों ने लातेहार (Latehar) में रेलवे ट्रैक उड़ा दिया है. भारत बंद (Bharat band) को सफल बनाने के लिए भाकपा माओवादियों (CPI Maoists) ने शुक्रवार की देर रात करीब 1 बजे लातेहार के डेमू-रिचुघुटा (demu-Richughuta) के बीच रेलवे पटरी पर बम ब्लास्ट कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया है. इस घटना के बाद डाउन रेलवे लाइन पर रेल परिचालन पूरी तरह ठप हो गई है. हालांकि वारदात के बाद रेलवे के द्वारा राहत कार्य शुरू कर दिया गया है. इस घटना की जांच में रेल प्रशासन जुटी गई है.  हालांकि, हादसे में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। फिलहाल इस सेक्शन में ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई है और मामले की जांच की जा रही है।

धमाके के कारण पटरी टूट जाने की वजह से एक डीजल लोकोमोटिव डीरेल हो गया।यह घटना टोरी-लातेहार रेल सेक्शन पर रिचुगुटा और डेमू स्टेशनों के बीच हुई। जानकारी के मुताबिक ब्लास्ट रात करीब पौने एक बजे हुआ। इससे रेलवे ट्रैक को खासा नुकसान पहुंचा है। घटना की सूचना मिलने के बाद रेल प्रशासन तत्काल सक्रिय हुआ और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के बाद रेलवे की टीम घटनास्थल की ओर रवाना हो गई. रेलवे की टीम पटरी को ठीक करने में लगी हुई है. वही इस घटना के बाद रेलवे का एक ट्रॉली भी बेपटरी हो गई है. मिली जानकारी के अनुसार घटनास्थल पर धनबाद मंडल के उच्चाधिकारी, रेल सुरक्षा बल स्थानीय पुलिस घटनास्थल पर पहुंच चुकी है।


माओवादी नेता की गिरफ्तारी का दिखाया गुस्सा

वारदात के बाद स्थानीय पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंचकर आसपास के इलाके में छापामारी कर रही है. झारखंड पुलिस(Jharkhand Police) ने पिछले दिनों भाकपा माओवादी प्रशांत बोस और उनकी पत्नी को गिरफ्तार किया. इस गिरफ्तारी के विरोध में नक्सलियों ने 20 नवंबर को भारत बंद (Bharat Band) की घोषणा की है. भारत बंद को सफल बनाने के लिए ही माओवादियों ने रेलवे ट्रैक को उड़ाया है.   घटना के बाद रेलवे ट्रैक पर परिचालन ठप हो गया है. 

माओवादियों के लिए लातेहार सबसे सुरक्षित निशाना

लातेहार जिले के रेलवे लाइन माओवादियों के सॉफ्ट टारगेट रहे हैं. जंगली इलाका रहने के कारण रात में माओवादी आसानी से घटना को अंजाम देकर जंगल की ओर फरार हो जाते हैं. इससे पहले भी जब माओवादियों का बोलबाला था तो अक्सर लातेहार जिले में पड़ने वाले रेलवे ट्रैक माओवादियों के निशाने पर होते थे। बीच के कुछ सालों में इस पर रोक लगी हुई थी, लेकिन शुक्रवार की रात एक बार फिर से रेलवे ट्रैक को निशाना बनाने की परंपरा आरंभ हुई है।

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