अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति ने गोष्ठी का किया आयोजन,लंबित मुकदमों के लिये दोषी कौन विषय पर हुई चर्चा

अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति ने गोष्ठी का किया आयोजन,लंबित मुकदमों के लिये दोषी कौन विषय पर हुई चर्चा

PATNA : अखिल भारतीय अधिवक्ता कल्याण समिति के बैनर तले लंबित मुकदमों के लिये दोषी कौन विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्य के विधि मंत्री प्रमोद कुमार virtual रूप से जुड़े। उन्होंने समारोह को सम्बोधित करते हुए कहा कि समय सीमा के भीतर मामलों की सुनवाई और निपटारा होना चाहिए। इस कार्यक्रम का उदघाटन पटना हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शिवाजी पांडेय ने किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष सह राज्य बार काउंसिल के उपाध्यक्ष धर्मनाथ प्रसाद यादव ने किया।

कार्यक्रम को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए राज्य के विधि मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा कि यदि आज हमारा देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तो उसके लिए इसमें अधिवक्ताओं की भूमिका बहुत ही अहम है। जजों की संख्या बढ़ाने को लेकर उन्होंने कहा कि इस विषय को लेकर उन्होंने केंद्रीय विधि मंत्री से मुलाकात किया है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल देश भर में करीब तीन करोड़ से भी ज्यादा मुकदमें लंबित हैं। उन्होंने संविधान दिवस के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दी। 

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्र ने कहा कि वकीलों का आचरण सभ्य होना चाहिए। बार काउंसिल को राज्यों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिलना दु:खद है, हालांकि इसके लिए कई बार प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हमें वर्चुअल कोर्ट स्वीकार नहीं है, वह भी तब जब कोरोना तकरीबन समाप्ति की ओर है। यदि अधिवक्ताओं की उचित मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा ,तो अधिवक्ता आंदोलन का रुख अख्तियार करेंगे। जस्टिस शिवाजी पांडेय ने कहा कि आज के दिनों में लंबित मुकदमें को लेकर कहा कि जजों की कमी के वजह से मुकदमों की लंबित संख्या में बढोतरी हुआ है। जजों और वकिलों दोनों के लिए बैठने की समस्या समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है।  

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा, स्टेट बार काउंसिल के अध्यक्ष व एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश चंद्र वर्मा भी कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

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