अंखफोड़वा कांड - 2 : डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने पर भड़का आईएमए, कहा - जनता के विरोध से बचने के लिए फोड़ा ठिकरा, होगा बुरा परिणाम

अंखफोड़वा कांड - 2 : डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने पर भड़का आईएमए, कहा - जनता के विरोध से बचने के लिए फोड़ा ठिकरा, होगा बुरा परिणाम

PATNA : मुजफ्फरपुर के आई अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद अपनी 26 मरीजों की आंख गंवाने के मामले में चार डॉक्टरों पर हुए प्राथमिकी का विरोध शुरू हो गया है। यह विरोध इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की तरफ से जताया गया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह प्राथमिकी सिर्फ इसलिए की गई है, ताकि मामले में जनता के विरोध को कम किया जा सके। 

एसोसिएशन की बिहार शाखा के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार और सेक्रेटरी डॉ सुनील कुमार ने मुजफ्फरपुर कांड को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।  लेकिन उन्होंने डॉक्टरों पर हुए प्राथमिकी पर अपनी चिंता जाहिर करते हुए बताया कि इससे भी ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण जांच कमेटी की जांच रिपोर्ट आए बिना नेत्र चिकित्सकों का नाम प्राथमिकी में उल्लेख किया गया है. आईएमए की तरफ से बात करते हुए दोनों डॉक्टर ने बताया कि मुजफ्फरपुर आंख अस्पताल से अल्पकालिक रूप से संबंधित डॉक्टर साहू और अन्य नेत्र चिकित्सक आंखों के ऑपरेशन के लिए योग्यता प्राप्त हैं. उन्हें अनगिनत ऑपरेशन का अनुभव है।

गलती नहीं सक्रमण को बताया कारण

आईएमए का कहना था कि मरीजों की आंखे लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि संक्रमण के कारण गई हैं। उनका कहना है कि एक पाली में कई मरीजों को ऑपरेशन के बाद जटिलताएं, लेकिन अन्य पालियों के सैकड़ों अन्य मरीजों में सफल ऑपरेशन साबित करता है कि ऑपरेशन के बाद ये जटिलताएं चिकित्सकों के ऑपरेशन प्रक्रिया में गलती नहीं होकर संक्रमण के कारण हुई है। आंखे गंवाने के पीछे तर्क दिया गया कि ऑपरेशन के उस पाली में प्रवृत्त आई ड्रॉप्स, सलाइन अथवा औजारों के सही ढंग से जीवाणु रहित नहीं होने के कारण भी यह संक्रमण हो सकता है.

प्राथमिकी का होगा परिणाम

आईएमए ने कहा है डॉक्टरों पर ये प्राथमिकी प्रशासन द्वारा जन आक्रोश से बचने की हड़बड़ी में कराई गई है. इसका बुरा परिणाम सरकार के अंधापन निवारण कार्यक्रम पर पड़ सकता है. आईएमए बिहार और बिहार ऑफथैलेमिक सोसायटी द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय जांच दल इस पूरी घटना की जांच करेगा. आईएमए ने सरकार से आग्रह किया है कि अपूर्ण जांच और सभी पक्षों को सुने बिना कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए।

बता दें कि बीते दिनों मुजफ्फरपुर के मुजफ्फरपुर आई हॉस्पीटल में 65 मरीजों का मोतियाबिंद ऑपरेशन के बाद करीब 25 लोगों की आंखों में समस्याएं होने लगी थी. इसके बाद गंभीर संक्रमण के कारण इनमें से अब तक 14 से अधिक मरीजों की आंखें निकालनी पड़ी थी. वहीं, अन्य करीब तीस की संख्या में लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई है।



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