अरविंद निषाद ने राजद सुप्रीमो पर साधा निशाना, कहा- मत्स्यजीवी समाज को लालू ने हमेशा ठगा

 अरविंद निषाद ने राजद सुप्रीमो पर साधा निशाना, कहा- मत्स्यजीवी समाज को लालू ने हमेशा ठगा

पटना. बिहार में दो सीटों पर हो रहे विधानसभा उपचुनाव को लेकर बिहार की राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है. सियासी पार्टी के बीच सियासी जुमलेबाजी भी तेज हो गयी है. इस बीच उपचुनाव में मत्स्यजीवी वोटरों को लुभाने के लिए राजद और जदयू में जंग छिड़ी हुई है. बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनावी सभा के दौरान तारापुर में मछली पकड़ते भी नजर आए. इसको जदयू ने नाटक करार दिया. इस बीच राजद और लालू परिवार पर जदयू प्रवक्ता ने निशाना साधा है.

लालू ने मत्स्यजीवी समाज को ठगा- अरविंद निषाद

जदयू के प्रवक्ता अरविंद निषाद ने राजद और पार्टी के सुप्रीमो लालू यादव पर तिखा हमला बोलते हुए कहा कि राजद और लालू ने मत्स्यजीवी समाज के साथ गलत व्यवहार किया है. जदयू प्रवक्ता ने कहा कि लालू ने राजद के कद्दावर नेता विद्यासागर निषाद को मत्स्य एवं पशुधन विभाग के मंत्री बनाया और मंत्री बनाकर जेल भेजवाने का काम किया. जिस तूफानी राम जी को हेलीकॉपर में घुमाकर आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया गया. ऐसे में राजद और लालू प्रसाद द्वारा मत्स्यजीवी समाज पर किया गया सलूक इतिहास में याद रखा जाएगा. मत्स्यजीवी समाज के लोग हमेशा इनके धुर्तई का शिकार हुआ है.

राजद ने मुकेश सहनी की बेइज्जती की- ललन सिंह

वहीं तेजस्वी यादव के ट्वीट पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी भड़क गये. उन्होंने तेजस्वी के ट्वीट पर पलटवार ट्वीट करते हुए कहा कि, 'पढ़ाई में कक्षा छोड़कर 9वीं फेल रहे वैसे ही जनता से मुंह चुराकर मछली पकड़ने का नाटक राजनीतिक अविश्वास सिद्ध होगा. 2020 में सरेआम मत्स्यजीवी समाज के नेता व वर्तमान केबिनेट मंत्री  मुकेश सहनी जी की बेइज्जती सबको याद है, ढ़ोंग मत करिए प्रवासी बाबू, लोग जागरूक हैं!.'

तेजस्वी ने ललन सिंह से मांफी की मांग की

चुनावी सभा में मछली पकड़ने को लेकर जदयू के निशाने पर आए नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मल्लाह समाज से जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को मांफी मांगने को कहा. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि, 'मत्स्यजीवी समाज को कम आत्मविश्वास वाला और मछली पकड़ने को हेय काम बताने वाले नीतीश जी के 'राष्ट्रीय अध्यक्ष’ को पूरे मल्लाह समाज से माफी माँगनी चाहिए. ये JDU-BJP वाले अपनी सामंती सोच को बस किसी तरह दबा, छुपा कर बैठे है. रह-रहकर वंचितों के प्रति जहर इनके मुँह से निकलता ही रहता है.


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